छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) एक बार फिर अपनी चयन प्रक्रिया को लेकर विवादों में घिर गया है. पारदर्शिता के तमाम दावों के बीच इस बार कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा 2026 का परिणाम सवालों के घेरे में आ गया है.
19 अप्रैल 2026 को आयोजित कोर्ट मैनेजर की मुख्य परीक्षा का परिणाम आयोग ने महज एक सप्ताह के भीतर जारी कर दिया. इतनी कम अवधि में उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किए जाने को लेकर अभ्यर्थियों ने गंभीर आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि इतने कम समय में निष्पक्ष और पारदर्शी मूल्यांकन संभव ही नहीं है.
शिकायतों के बाद अभ्यर्थियों ने खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा
अभ्यर्थियों का आरोप है कि आयोग को लगातार शिकायतें भेजी गईं, लेकिन उनकी आपत्तियों पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया. इसके बाद उम्मीदवारों ने सूचना के अधिकार (RTI) कानून के तहत जानकारी भी मांगी, मगर वहां भी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई. आयोग से जवाब नहीं मिलने पर नाराज अभ्यर्थियों ने आखिरकार छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का रुख किया. मामले की सुनवाई 21 मई को अवकाशकालीन पीठ (Vacation Bench) में न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास के समक्ष हुई.
याचिका में लगाए गए गंभीर आरोप
याचिकाकर्ता अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता सुमित सिंह राठौर और दीपा श्रीवास ने अदालत में दलील दी कि कोर्ट मैनेजर भर्ती परीक्षा 2026 की चयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. याचिका में चयनित उम्मीदवारों के साक्षात्कार और आगे की नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की गई है.
अभ्यर्थियों के अनुसार, चयनित उम्मीदवारों के साक्षात्कार 22 मई से प्रस्तावित थे, जिसके बाद नियुक्तियां दी जानी थीं. याचिका में मुख्य परीक्षा की न्यायिक जांच कराने, सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं (Answer Sheets) सार्वजनिक करने, साक्षात्कार प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और मूल्यांकन प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है.
"खाली कॉपियों वाले उम्मीदवार भी चयनित"
अभ्यर्थियों ने अदालत में यह भी आरोप लगाया है कि कई ऐसे उम्मीदवारों का चयन किया गया है, जिन्होंने मुख्य परीक्षा में लगभग खाली उत्तर पुस्तिकाएं जमा की थीं. इसके अलावा, एक ही परीक्षा कक्ष से असामान्य रूप से बड़ी संख्या में उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं.
साथ ही परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा जांच और ड्रेस कोड के पालन में भेदभाव के आरोप भी लगाए गए हैं. अभ्यर्थियों का कहना है कि कुछ उम्मीदवारों को विशेष छूट दी गई, जबकि सामान्य परीक्षार्थियों पर सख्त नियम लागू किए गए.
आयोग से जवाब तलब, अगली सुनवाई 5 अगस्त को
बताया जा रहा है कि अदालत में भी आयोग की ओर से कोई ठोस जवाब पेश नहीं किया जा सका. मामले की गंभीरता को देखते हुए अब अगली सुनवाई 5 अगस्त 2026 को तय की गई है. वहीं, असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने संकेत दिए हैं कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो वे इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं. उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने से योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अंधकार में जा सकता है.
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