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This Article is From Jan 23, 2026

छत्तीसगढ़ में साहित्य उत्सव 2026 का शुभारंभ: देशभर से 120 साहित्यकार पहुंचे रायपुर, 4 पुस्तकों का किया गया विमोचन

Sahitya Utsav 2026: छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका, एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ और राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया.

छत्तीसगढ़ में साहित्य उत्सव 2026 का शुभारंभ: देशभर से 120 साहित्यकार पहुंचे रायपुर, 4 पुस्तकों का किया गया विमोचन

Chhattisgarh Sahitya Utsav 2026: राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन परिसर में आज रायपुर साहित्य उत्सव 2026 का शुभारंभ किया गया. राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साहित्य उत्सव 2026 का शुभारंभ किया.  समारोह का आयोजन विनोद कुमार शुक्ल मंडप में किया गया. इस कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री अरुण साव, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति डॉ. कुमुद शर्मा, अभिनेता मनोज जोशी मौजूद रहे.

इस खास मौके पर छत्तीसगढ़ राज्य के 25 वर्ष पूर्ण होने पर आधारित पुस्तिका एक कॉफी टेबल बुक छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार, जे. नंदकुमार द्वारा लिखित पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, प्रो. अंशु जोशी की पुस्तक लाल दीवारें, सफेद झूठ और राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे का विमोचन किया गया.

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उप सभापति हरिवंश ने छत्तीसगढ़ के महान साहित्यकार स्वर्गीय विनोद कुमार शुक्ल को नमन करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ी साहित्य की एक समृद्ध और प्राचीन परंपरा रही है. इस प्रदेश ने अपनी स्थानीय संस्कृति को सदैव मजबूती से संजोकर रखा है. रायपुर साहित्य उत्सव के आयोजन में अत्यंत रचनात्मक दृष्टिकोण स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.

उन्होंने कबीर के काशी से गहरे संबंधों का उल्लेख करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा से भी उनका विशेष जुड़ाव रहा है.  उप सभापति ने कहा कि एक पुस्तक और एक लेखक भी दुनिया को बदलने की शक्ति रखते हैं. उन्होंने राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देता है, आशा जगाता है, निराशा से उबारता है और जीवन जीने का साहस प्रदान करता है.

उपसभापति हरिवंश ने कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है और 2047 तक विकसित भारत का संकल्प हमारा राष्ट्रीय लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि भारत आज स्टील, चावल उत्पादन और स्टार्टअप्स के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है. देश की आत्मनिर्भरता से दुनिया को नई दिशा मिली है और इस राष्ट्रीय शक्ति के पीछे साहित्य की सशक्त भूमिका रही है. 

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मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्रभु श्रीराम का ननिहाल है और इस पावन भूमि पर तीन दिवसीय रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ होना हम सभी के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने देशभर से आए साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों का स्वागत करते हुए कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव 2026 साहित्य का एक महाकुंभ है, जिसमें प्रदेश और देश के विभिन्न राज्यों से आए 120 से अधिक ख्यातिप्राप्त साहित्यकार सहभागिता कर रहे हैं. आयोजन के दौरान कुल 42 सत्रों में समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विषयों पर गहन विमर्श होगा. यह समय गणतंत्र के अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के रजत जयंती वर्ष का है, इसी भाव के अनुरूप इस उत्सव का आयोजन किया गया है.

मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता संग्राम की तुलना समुद्र मंथन से करते हुए कहा कि जिस प्रकार समुद्र मंथन में विष और अमृत दोनों निकले, उसी प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में हमारे सेनानियों ने विष रूपी कष्ट स्वयं सहकर आने वाली पीढ़ियों को आज़ादी का अमृत प्रदान किया. उन्होंने कहा कि हमारे अनेक स्वतंत्रता सेनानी लेखक, पत्रकार और वकील भी थे. माखनलाल चतुर्वेदी द्वारा बिलासपुर जेल में रचित पुष्प की अभिलाषा जैसी रचनाओं ने देशवासियों को प्रेरित किया. माधवराव सप्रे की कहानी एक टोकरी भर मिट्टी को हिंदी की पहली कहानी माना जाता है.

मुख्यमंत्री ने पंडित लोचन प्रसाद पांडेय, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और गजानन माधव मुक्तिबोध जैसे साहित्यकारों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृतियों को सहेजना हमारी सांस्कृतिक जिम्मेदारी है. राजनांदगांव में त्रिवेणी संग्रहालय का निर्माण इसी भावना का प्रतीक है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर साहित्य उत्सव के मंडपों को विनोद कुमार शुक्ल, श्यामलाल चतुर्वेदी, लाला जगदलपुरी और अनिरुद्ध नीरव जैसे महान साहित्यकारों को समर्पित किया गया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ की संस्कृति और साहित्य को नई पहचान दी. उन्होंने कहा कि कविता अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध करना सिखाती है और यही साहित्य की वास्तविक शक्ति है.

मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्मृति में आयोजित काव्यपाठ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि अटल जी कवि हृदय थे और उनकी कविताओं ने करोड़ों लोगों को प्रेरणा दी. “हार नहीं मानूंगा…” जैसी पंक्तियां आज भी जनमानस को संबल देती हैं.

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