CG News: कोरिया में कृषि मौसम इकाई हुई बंद, जानकारी के अभाव में फसल उत्पादन पर पड़ सकता है असर

Koriya News: छत्तीसगढ़ के साथ ही देशभर में कृषि मौसम इकाईयों को बंद किया गया है, जिसमें कोरिया जिले की इकाई भी शामिल है. जिले में मौसम वेधशाला के संचालन से यहां के किसानों को काफी मदद मिलती थी, लेकिन अब इसे एक मार्च से बंद कर दिया गया है.

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Agricultural Meteorological Unit Closed: छत्तीसगढ़ के कोरिया (Koriya) जिले में संचालित एकमात्र मौसम वेधशाला (Weather Observatory) को बंद कर दिया गया है. जिसकी वजह से मौसम वेधशाला से जारी होने वाले मौसम पूर्वानुमान और एडवाइजरी की सुविधा बंद हो गई है. इससे जिले के किसानों को न तो मौसम का पूर्वानुमान मिल पा रहा है और न ही मौसम (Weather News) के हिसाब से खेती के लिए एडवाइजरी. ग्राम सलका में संचालित जिले की एक मात्र कृषि मौसम इकाई को 1 मार्च से बंद कर दिया गया है. जबकि जिले के ज्यादातर लोग खेती किसानी पर ही निर्भर हैं.

देशभर में बंद हुई 199 इकाइयां

बता दें कि कृषि मौसम इकाई के बंद होने से कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) प्रक्षेत्र में लगा अत्याधुनिक स्वचालित मौसम प्रेक्षण इकाई बंद हो गया है. देशभर में 199 व प्रदेश में 9 इकाइयों को बंद किया गया है. भारत मौसम विभाग ने कृषि विज्ञान केंद्र को पत्र जारी कर इसकी सूचना दी है. कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि सरकार ने अचानक इकाई को बंद कर दिया है. इसके पीछे आर्थिक स्थिति कमजोर होना बताया गया है. जबकि देशभर में विषय वस्तु विशेषज्ञों की नियुक्ति के दौरान उन्हें 2026 तक अनुबंध पर रखा गया था. अचानक एडवाइजरी व मौसम की सूचना बंद होने से जिले के किसानों को मौसम का पूर्वानुमान, कृषि मौसम सलाह, फसलों का उचित प्रबंधन, दवाओं के उपयोग सहित अन्य जानकारी नहीं मिल पा रही हैं.

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काफी मददगार था मौसम विज्ञान केंद्र 

आकस्मिक आपदा आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश, ओले, आकाशीय बिजली गिरने आदि की सूचना 48 से 72 घंटों पहले जिले के किसानों को मिल जाती थी. इससे समय रहते फसलों के साथ पशुधन व जन धन को होने वाली हानि को कम करने में सहायता मिलती थी. कृषि विज्ञान केंद्र कोरिया ने हर ब्लॉक के लिए अलग-अलग ग्रुप बनाए थे. इसमें किसानों को सप्ताह में दो बार फसल, पशुओं, दवाई का छिड़काव सहित अन्य जानकारी व सलाह दी जाती थी.

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7 साल पहले शुरू हुई सुविधा बंद

जिले के किसानों का कहना है कि जिले में कृषि मौसम इकाई की शुरुआत 7 साल पहले हुई थी. इसकी स्थापना मौसम विज्ञान विभाग और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के समन्वय से की गई थी. धीरे-धीरे यह केंद्र जिले में प्रभावी हो गया. इससे हर सप्ताह जिले के हर ब्लॉक की अलग-अलग मौसम की जानकारी किसानों को दी जाती थी ताकि किसान पहले से सचेत हो जाएं.

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