जैन मुनि आचार्य विद्यासागर का छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित जैन तीर्थ स्थान चंद्रगिरी में शनिवार की रात 2 बजकर 35 मिनट पर निधन हो गया. उनकी मौत पर छत्तीसगढ़ शासन ने 18 फरवरी को आधे का दिन का राज्यकीय शोक की घोषणा की है. इसके साथ ही प्रदेश में राष्ट्र ध्वज आधा झुका दिया गया है और किसी भी तरह का सांस्कृतिक या हर्षोल्लास वाले कार्यक्रम पर एक दिन के लिए रोक लगा दी गई है.
राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन भी हुए भावुक
जैन मुनि आचार्य विद्यासागर निधन पर राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने लिखा कि परम वंदनीय संत, आचार्य विद्यासागर महाराज के ब्रह्मलीन होने का समाचार मिला. ईश्वर उन्हें अपने श्रीचरणों में आश्रय प्रदान करें. विश्व-कल्याण के लिए आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का समर्पण अविस्मरणीय है. आचार्य श्री के चरणों में कोटि-कोटि नमन.
जैन मुनि आचार्य विद्यासागर निधन पर कैबिनेट मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने संवेदना व्यक्त किया है. उन्होंने सोशल मीडिया साइट एक्स पर लिखा कि आध्यात्मिक चेतना के पुंज, संत शिरोमणि आचार्य परमपूज्य विद्यासागर महाराज जो तप, त्याग, ध्यान, धारणा समाधि, समाधान के साक्षात स्वरूप थे. वो आज हमारे पावन डोंगरगढ़ के चंद्रगिरि तीर्थ में चिर समाधि में लीन हो गए. लाखों मनुष्यों के कष्टों का हरण करने वाले, उन्हें अपने इष्ट से मिलाने वाले, उनके अभीष्ट की पूर्ति करने वाले तीर्थ स्वरूप, परमपूज्य गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज श्री चरणों में दण्डवत प्रणाम, कोटि-कोटि नमन
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बताया प्रेरणा स्रोत
जैन मुनि आचार्य विद्यासागर के निधन पर आध्यात्मिक चेतना के पुंज, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी की सल्लेखना समाधि का समाचार समस्त मानव समाज को नि:शब्द करने वाला है. ईश्वर उन्हें अपने श्री चरणों में स्थान दें. आचार्य जी की शिक्षाएं सदैव हम सभी को मानव कल्याण एवं प्राणी सेवा की प्रेरणा देती रहेंगी. शत् शत् नमन .
आध्यात्मिक चेतना के पुंज, संत शिरोमणि आचार्य परमपूज्य विद्यासागर जी महाराज जो तप, त्याग, ध्यान, धारणा समाधि, समाधान के साक्षात् स्वरूप थे जो आज हमारे पावन डोंगरगढ़ के चंद्रगिरि तीर्थ में चिर समाधि में लीन हो गए।
लाखों मनुष्यों के कष्टों का हरण करने वाले, उन्हें अपने इष्ट से… pic.twitter.com/2p3FKcKyHK
पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने भी जताया दुख
जैन धर्म के संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर महाराज की छत्तीसगढ़ के चंद्रगिरी तीर्थ, डोंगरगढ़ में सल्लेखना पूर्वक समाधि का समाचार समस्त जैन समाज के साथ पूरे देश और विश्व के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उन्होंने आगे लिखा कि आचार्य जी की शिक्षा, ज्ञान और मानव कल्याण की भावना को शत शत नमन. उनका तपस्या पूर्ण जीवन हम सभी का सदैव पथ प्रदर्शक बना रहेगा.
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