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    एक दिन नहीं, एक सोच: राष्ट्रीय बालिका दिवस और ज़मीनी हकीकत

    National Girl Child Day: भारत के कई अन्य हिस्सों में आज भी बेटियों को “सुरक्षा” के नाम पर सीमित किया जाता है, शिक्षा को बोझ समझा जाता है और आर्थिक निर्भरता को सामान्य माना जाता है. यहाँ नीतियाँ तो हैं, लेकिन ज़मीनी क्रियान्वयन और सामाजिक स्वीकार्यता कमजोर है. यही कारण है कि एक ही देश में महिला सशक्तिकरण की तस्वीर दो अलग-अलग भारत दिखाती है.

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