Lok Sabha Polls 2024: एक्सपर्ट्स का दावा, सबसे बड़े लोकतंत्र भारत में हो रहा है दुनिया का सबसे खर्चीला चुनाव

Indian Election 2024: वाशिंगटन डीसी के NGO ‘ओपन सीक्रेट्स डॉट ओआरजी' के अनुसार इंडिया में 96.6 करोड़ वोटर्स के साथ, प्रति वोटर खर्च लगभग 1,400 रुपये होने का अनुमान है. इस संस्था का कहना है कि यह खर्च 2020 के अमेरिकी चुनाव (US Election) के खर्च से ज्यादा है.

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Lok Sabha Election 2024: इन दिनों हमारा देश लोकतंत्र का पर्व मना रहा है. भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्रिक देश कहा जाता है. वहीं एक्सपर्ट्स का दावा है कि इस साल का आम चुनाव खर्चों के लिहाज में पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ देगा और 2024 का लोकसभा चुनाव दुनिया का सबसे खर्चीला चुनाव होने जा रहा है. ‘सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज' Centre for Media Studies (CMS) चुनाव संबंधी खर्चों पर पिछले करीब 35 साल से नजर रखने वाली गैर-लाभकारी संस्था है. इस संगठन के अध्यक्ष एन भास्कर राव का दावा है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में अनुमानित खर्च 1.35 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 2019 में खर्च किए गए 60 हजार करोड़ रुपये से दोगुने से भी ज्यादा है.

कौन से खर्चे हैं शामिल?

एन भास्कर राव ने कहा कि इस व्यापक खर्च में राजनीतिक दलों और संगठनों, उम्मीदवारों, सरकार और निर्वाचन आयोग सहित चुनावों से संबंधित प्रत्यक्ष या परोक्ष सभी खर्च शामिल हैं. राव का कहना कि उन्होंने प्रारंभिक खर्च के अनुमान को 1.2 लाख करोड़ रुपये से संशोधित कर 1.35 लाख करोड़ रुपये कर दिया, जिसमें इलेक्टोरल बॉन्ड के खुलासे के बाद के आंकड़े और सभी चुनाव-संबंधित खर्चों का हिसाब शामिल है.

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एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' (ADR) ने हाल में भारत में राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता की बड़ी कमी की ओर इशारा किया था. ADR ने दावा किया कि 2004-05 से 2022-23 तक, देश के 6 प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को कुल 19,083 करोड़ रुपये का लगभग 60 प्रतिशत योगदान अज्ञात स्रोतों से मिला, जिसमें इलेक्टोरल बॉन्ड से प्राप्त पैसा भी शामिल था.

वहीं वाशिंगटन डीसी (Washington DC) की गैर-लाभकारी संस्था (non-profit organization) NGO ‘ओपन सीक्रेट्स डॉट ओआरजी' (OpenSecrets.org) के अनुसार इंडिया में 96.6 करोड़ वोटर्स के साथ, प्रति वोटर खर्च लगभग 1,400 रुपये होने का अनुमान है. इस संस्था का कहना है कि यह खर्च 2020 के अमेरिकी चुनाव (US Election) के खर्च से ज्यादा है, जो 14.4 अरब डॉलर या लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपये था. इसके अलावा विज्ञापन एजेंसी डेंटसू क्रियेटिव (Dentsu Creative) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अमित वाधवा ने कहा इस साल डिजिटल प्रचार (Digital Promotion) बहुत ज्यादा हो रहा है. उन्होंने कहा कि पॉलिटिकल पार्टियां कॉर्पोरेट ब्रांड की तरह काम कर रही हैं और प्राेफेशनल एजेंसियों की सेवाएं ले रही हैं.

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