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100 साल पुराना वो अखबार, जिसके संपादक थे महात्मा गांधी, गाडरवारा के पुस्तकालय में आज भी है सुरक्षित
- Friday January 9, 2026
- Written by: आशीष जैन, Edited by: विश्वनाथ सैनी
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के श्री सार्वजनिक पुस्तकालय, तिलक भवन गाडरवारा का 111 साल पुराना पुस्तकालय आज भी महात्मा गांधी द्वारा संपादित “हिंदी नवजीवन” समेत कई दुर्लभ अखबारों और पुस्तकों को सहेजे हुए है. यही वह स्थान है जहां दार्शनिक ओशो ने सैकड़ों पुस्तकें पढ़ीं. यह पुस्तकालय आजादी-पूर्व पत्रकारिता और विचारधारा की जीवित विरासत है.
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ओशो की जन्म स्थली पहुंचे मुरारी बापू, पूजा-अर्चना कर लगाया ध्यान; बताया OSHO नाम का असली मतलब
- Friday December 5, 2025
- Written by: पवन सिलावट, Edited by: धीरज आव्हाड़
ओशो की 94th Jayanti पर Murari Bapu ने ओशो की जन्मस्थली Kuchwada पहुंचकर ध्यान और पूजा-अर्चना की. देश–विदेश से आए Osho Followers ने आध्यात्मिक वातावरण में Meditation किया. Murari Bapu ने OSHO नाम का असली अर्थ बताते हुए उनकी Teachings और Spiritual Consciousness को नमन किया.
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शिक्षक दिवस पर निर्माता सुभाष घई ने ओशो को किया याद
- Friday September 5, 2025
- Reported by: आईएएनएस, Written by: सुमित शुक्ला
Subhash Ghai : ओशो का असली नाम रजनीश चंद्र मोहन जैन था. ओशो 20वीं सदी के महान आध्यात्मिक गुरु थे. वह एक विवादों में रहने वाले गुरु थे. जिन्होंने कभी भी संगठित धर्म को स्वीकार नहीं किया.
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मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के श्री सार्वजनिक पुस्तकालय, तिलक भवन गाडरवारा का 111 साल पुराना पुस्तकालय आज भी महात्मा गांधी द्वारा संपादित “हिंदी नवजीवन” समेत कई दुर्लभ अखबारों और पुस्तकों को सहेजे हुए है. यही वह स्थान है जहां दार्शनिक ओशो ने सैकड़ों पुस्तकें पढ़ीं. यह पुस्तकालय आजादी-पूर्व पत्रकारिता और विचारधारा की जीवित विरासत है.
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Subhash Ghai : ओशो का असली नाम रजनीश चंद्र मोहन जैन था. ओशो 20वीं सदी के महान आध्यात्मिक गुरु थे. वह एक विवादों में रहने वाले गुरु थे. जिन्होंने कभी भी संगठित धर्म को स्वीकार नहीं किया.
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