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Chhatarpur District Madhya Pradesh

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'Chhatarpur District Madhya Pradesh' - 2 News Result(s)
  • Loksabha chunav 2024: छतरपुर जिला चुनता है 3 सांसद पर 15 सालों से कोई 'माननीय' यहां नहीं रहता !

    Loksabha chunav 2024: छतरपुर जिला चुनता है 3 सांसद पर 15 सालों से कोई 'माननीय' यहां नहीं रहता !

    छतरपुर जिला तीन संसदीय क्षेत्रों में विभाजित हैं..यहां के मतदाता तीन सांसदों को चुनने के लिए मतदान करते हैं. हालांकि जिले का दर्द ये है कि यहां के लोग तीन सांसद तो चुनते हैं लेकिन एक भी सांसद यहां नहीं रहता यानी न तो उनका आवास और न ही प्रशासनिक कार्यालय ही यहां हैं. ये हालत पिछले 15 सालों से है. जिसकी वजह से जिले के मतदाताओं को अपने क्षेत्रीय सांसदों को शिकायत दर्ज कराने के लिए उनके दूसरे जिलों में स्थित कार्यालयों तक जाना पड़ता है.

  • इलाज के पैसे नहीं चुकाए तो अस्पताल ने पत्‍नी का शव देने से किया इनकार

    इलाज के पैसे नहीं चुकाए तो अस्पताल ने पत्‍नी का शव देने से किया इनकार

    मुन्‍नीलाल ने बताया कि उसकी पत्‍नी को 11 अगस्‍त को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था. मैं अपनी पत्नी का जेवर साहूकार के यहां गिरवी रखकर पैसा लाया था. अस्‍पताल में 14 हजार रुपये खर्च हो गए और अस्‍पताल प्रबंधन कह रहा है कि बीस हजार रूपए और लाओ तभी डेड बॉडी मिलेगी.

'Chhatarpur District Madhya Pradesh' - 2 News Result(s)
  • Loksabha chunav 2024: छतरपुर जिला चुनता है 3 सांसद पर 15 सालों से कोई 'माननीय' यहां नहीं रहता !

    Loksabha chunav 2024: छतरपुर जिला चुनता है 3 सांसद पर 15 सालों से कोई 'माननीय' यहां नहीं रहता !

    छतरपुर जिला तीन संसदीय क्षेत्रों में विभाजित हैं..यहां के मतदाता तीन सांसदों को चुनने के लिए मतदान करते हैं. हालांकि जिले का दर्द ये है कि यहां के लोग तीन सांसद तो चुनते हैं लेकिन एक भी सांसद यहां नहीं रहता यानी न तो उनका आवास और न ही प्रशासनिक कार्यालय ही यहां हैं. ये हालत पिछले 15 सालों से है. जिसकी वजह से जिले के मतदाताओं को अपने क्षेत्रीय सांसदों को शिकायत दर्ज कराने के लिए उनके दूसरे जिलों में स्थित कार्यालयों तक जाना पड़ता है.

  • इलाज के पैसे नहीं चुकाए तो अस्पताल ने पत्‍नी का शव देने से किया इनकार

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    मुन्‍नीलाल ने बताया कि उसकी पत्‍नी को 11 अगस्‍त को अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था. मैं अपनी पत्नी का जेवर साहूकार के यहां गिरवी रखकर पैसा लाया था. अस्‍पताल में 14 हजार रुपये खर्च हो गए और अस्‍पताल प्रबंधन कह रहा है कि बीस हजार रूपए और लाओ तभी डेड बॉडी मिलेगी.

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