सतना सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 21 कैदी हुए रिहा

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सतना सेंट्रल जेल से कैदियों को फलदार पौधा और सुंदरकांड देकर किया गया रिहा. जेल अधीक्षक लीना कोस्टा ने दी जिम्मेदारीपूर्ण जीवन जीने की नसीहत.

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गलवार को सतना सेंट्रल जेल से 21 कैदियों को रिहा किया गया, यह सभी कैदी अलग-अलग अपराधों पर सतना सेंट्रल जेल में सजा काट रहे थे. जेल में अच्छे आचरण को देखते हुए शासन आदेशानुसार इन सभी कैदियों को जेल से रिहा किया गया. रिहा हुए सभी 21 बंदियों में 3 सतना जिले, 10 छतरपुर, 6 पन्ना वहीं एक कैदी बालाघाट जिले का रहने वाला है. सभी कैदियों को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी. 

हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर रिहा किए जाते हैं बंदी

कई वर्षो से मघ्य प्रदेश के विभिन्न जिलों मे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कैदियों को रिहा करने की एक परंपरा है. कैदियों की सजा की अवधि पूर्ण होने पर उन्हे जेल से मुक्त कर दिया जाता है. कुछ ऐसे मामले भी हैं जिसमें कैदियों के आचरण एवं व्यवाहारिक सुधार को देखते हुए उन्हे जेल से रिहा किया जाता आया है. 
 

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महामहीम राष्ट्रपति ने भी कही थी लंबित मामलों में एक्शन की बात  
  
संविधान दिवस पर सुप्रीम कोर्ट में अपने संबोधन के दौरान महामहीम राष्ट्रपति श्रीमति द्रोपदी मुर्मू ने जेलों मे बढ़ती कैदियों की संख्या पर विशेष ध्यान देते हुए कहा था कि " जरा उन कैदियों के विषय में सोंचिए जो सालों से जेल में कैद हैं क्योंकि वे वकीलों की फीस वहन नही कर सकते."  

पने बच्चे की तरह करें पौधों की देखभाल : जेल अधीक्षक लीना कोस्टा 

जेल अधीक्षक लीना कोस्टा

प्रेस को संबोधित करते हुए जेल अधीक्षक लीना कोस्टा ने कहा कि  "रिहा हो रहे सभी कैदियों को एक फलदार वृक्ष और सुंदरकांड की पुस्तक दी गई है, सभी को अपने घर पर वृक्ष लगाकर उनकी देखभाल अपने बच्चों की तरह करनी है. बंदी जेल के अंदर भी सुंदरकांड का पाठ किया करते थे आगे भी रोजाना सुंदरकांड का पाठ करने को कहा गया है. इस प्रकार वे धर्म कर्म से जुड़कर एक अच्छा जीवन जी पाएंगें."
 

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