धैर्य नहीं, तैयारी की अपेक्षा... बजट 2026 क्यों खास?

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डॉ अनन्या मिश्र

भारत का बजट अक्सर युवाओं के लिए “नौकरी मिली क्या? कितने की मिली?” के प्रश्न में सिमट जाता है, लेकिन 2026 का बजट इस सीमित दृष्टि से आगे देखने का अवसर देता है. आज भारत में हर वर्ष लगभग 1.5 करोड़ युवा ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा कर रहे हैं. यह युवा केवल रोजगार का आकांक्षी नहीं, बल्कि निर्माता, नवाचारकर्ता और अर्थव्यवस्था का सक्रिय भागीदार है. आज भारत में 1.25 लाख से अधिक मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स सक्रिय हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं द्वारा संचालित है. ऐसे में बजट 2026 का महत्व इस बात में है कि वह रोजगार की घोषणाओं से आगे बढ़कर अवसरों पर निवेश करता दिखता है और एक ऐसी संरचना बना रहा है, जो अगले एक दशक में युवा भारत की दिशा तय कर सकती है.

भारत की जनसांख्यिकी भी इसी बात को सिद्ध करती है. देश की औसत आयु लगभग 28 वर्ष है और हर वर्ष करीब 1.2 करोड़ युवा कार्यबल में प्रवेश करते हैं. यह संख्या चुनौती नहीं, बल्कि ऐतिहासिक अवसर है. बजट 2026 में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक का सार्वजनिक पूंजीगत व्यय बताता है कि अर्थव्यवस्था को केवल खर्च से नहीं, बल्कि निर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रोडक्शन से गति दी जाए.

इंफ्रास्ट्रक्चर में यह निवेश अब केवल सड़कों और पुलों तक सीमित नहीं रहता. यह निर्माण, डिजाइन, सिटी प्लानिंग, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल इंटीग्रेशन और पर्यावरणीय सेवाओं तक में रोजगार के अवसर देता है. आज भारत में हर वर्ष अनुमानतः 80 से 90 लाख युवा रोजगार की तलाश में अपने शहर या राज्य से दूसरे शहरों की ओर पलायन करते हैं. ऐसे में कनेक्टिविटी मजबूत होगी, तो यह दबाव भी संतुलित रहेगा.

बजट का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है फ्यूचर-रेडी इंडस्ट्री में होने वाला निवेश. सेमीकंडक्टर, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, एआई और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में घोषित हजारों करोड़ रुपये का निवेश दिखाता है कि भारत अब केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि वैश्विक मूल्य-श्रृंखला का हिस्सा बनना चाहता है. इन क्षेत्रों की नौकरियां अलग होती हैं, क्योंकि ये स्किल, रिसर्च और इनोवेशन की मांग करती हैं. यही कारण है कि यह निवेश आवश्यक है, क्योंकि विभिन्न आकलनों के अनुसार भारत में लगभग 45 से 50 प्रतिशत ग्रेजुएट युवा वर्तमान में टेक-सेवी और नौकरी की जरूरतों के अनुरूप कुशल नहीं माने जाते हैं. स्किल गैप को दूर करने के लिए भी यह बजट महत्वपूर्ण है.

युवा इंजीनियर, डेटा साइंटिस्ट, चिप-डिजाइनर, बायो-इन्फॉर्मेटिक्स एक्सपर्ट और एआई ट्रेनर, ये सभी जॉब प्रोफाइल आने वाले वर्षों में भारत के उद्योग बाजार का चेहरा बदल सकते हैं. ऐसे उद्योगों में निवेश का अर्थ है अच्छी तनख्वाह और लंबे समय तक करियर की स्थिरता.

बजट 2026 का एक कम चर्चित, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू है रचनात्मक अर्थव्यवस्था पर बढ़ता ध्यान. एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में भारत की युवा पीढ़ी पहले से सक्रिय है. आज भारत में 45 करोड़ से अधिक सोशल मीडिया उपयोगकर्ता हैं और उनमें से लगभग 65 प्रतिशत की आयु 35 वर्ष से कम है. यह केवल उपभोग नहीं, बल्कि सृजन की शक्ति है.

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अनुमान है कि एवीजीसी और डिजिटल क्रिएटिव सेक्टर आने वाले वर्षों में लाखों नए कौशल-आधारित रोजगार उत्पन्न कर सकता है. बजट संकेत देता है कि इस क्षेत्र को अब केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि निर्यात-योग्य आर्थिक क्षमता के रूप में देखा जा रहा है. युवाओं के लिए इसका अर्थ है कि करियर के विकल्प अब केवल कॉरपोरेट या सरकारी ढांचों तक सीमित नहीं. रचनात्मक कौशल भी आर्थिक सम्मान पा सकते हैं, बशर्ते प्रशिक्षण, बौद्धिक संपदा संरक्षण और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित हो.

डिजिटल इंडिया के अगले चरण, जिसे कई लोग “डिजिटल इंडिया 2.0” कह रहे हैं, का महत्व भी यहीं से जुड़ता है. डिजिटल अवसंरचना पर पिछले वर्षों में किए गए निवेश ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट उपयोगकर्ता देशों में ला खड़ा किया है, जहां इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या 90 करोड़ से अधिक है. अब बजट 2026 का संकेत यह है कि डिजिटल ढांचा केवल सेवाओं की डिलीवरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि नवाचार और उद्यमिता में भी मदद करेगा. एआई आधारित प्लेटफॉर्म, डेटा इकोनॉमी और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में युवा पहले से अग्रणी भूमिका में हैं. यह बजट उन्हें उपभोक्ता से निर्माता बनने का अवसर देता है.

इस डिजिटल निवेश का लाभ टियर-2 और टियर-3 शहरों तक पहुंचेगा, जिससे अवसर महानगरों तक सीमित नहीं रहेंगे. इससे माइग्रेशन का दबाव घट सकता है और स्थानीय युवाओं को अपने ही शहरों में रोजगार के अवसर मिल सकते हैं. यह बदलाव भारत की असमान क्षेत्रीय विकास की समस्या को भी धीरे-धीरे संतुलित कर सकता है.

युवाओं के लिए बजट 2026 का संदेश इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उनसे केवल धैर्य नहीं, बल्कि तैयारी की अपेक्षा करता है. सरकार ढांचा और निवेश उपलब्ध करा सकती है, लेकिन इन अवसरों का लाभ वही युवा उठा पाएंगे, जो कौशल-उन्नयन, अनुकूलन और निरंतर सीखने के लिए तैयार हैं. बजट 2026 को इसलिए युवाओं के लिए राहत पैकेज नहीं, बल्कि दिशा-दस्तावेज के रूप में देखना चाहिए, जो यह मानता है कि भारत की सबसे बड़ी पूंजी उसकी युवा आबादी है, और उसी में निवेश करना भविष्य में निवेश करना है.

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डॉ. अनन्या मिश्र, लेखिका, कम्युनिकेशन एवं ब्रांडिंग सलाहकार

डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने हैं.