MP Winter Session: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में 1 दिसंबर से शीतकालीन विधानसभा सत्र की शुरुआत होने जा रही है. यह सत्र पांच दिनों का होगा, जिसमें कुल चार बैठकें प्रस्तावित हैं. सत्र की कम अवधि को लेकर कांग्रेस ने असंतोष जताया है. इसके साथ ही सरकार को घेरने की रणनीति पर काम तेज कर दिया है. सत्र से पहले कांग्रेस विधायक दल की बैठक भोपाल में हुई, जिसमें प्रमुख मुद्दों पर चर्चा के बाद रणनीति तैयार की गई.
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार जनता से जुड़े सवालों पर जवाब देने से बच रही है. नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार किसानों, युवाओं और आम जनता के मुद्दों से लगातार मुंह मोड़ रही है. उन्होंने कहा कि प्रदेश में खाद की कमी से किसान परेशान हैं, फसल नुकसान को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं और भर्ती घोटालों से युवा मानसिक रूप से त्रस्त हैं.
'सरकार चर्चा से भाग रही है'
सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रदेश में कफ सिरप मौत प्रकरण से लेकर इंदौर एमवाय हॉस्पिटल में बच्चों को चूहों के काटने की घटनाओं तक पर सरकार ने किसी पर कोई भी उचित प्रतिक्रिया नहीं दी. सिंघार ने आगे कहा कि भ्रष्टाचार की कई फाइलें और लोकायुक्त के प्रतिवेदन लंबित हैं, लेकिन सरकार चर्चा से भाग रही है. उनका सीधा सवाल था कि सरकार सत्र छोटा क्यों कर रही है? जवाब देने से क्यों बच रही है?”
राज्य की खराब स्थिति पर भड़के पटवारी
उधर, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश का हर इंडेक्स नीचे गया है. कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और केंद्र व राज्य सरकार की “गारंटी” का कोई लाभ जनता को नहीं मिला. पटवारी ने आरोप लगाया कि बहनों की योजनाओं का लगभग 70 हजार करोड़ रुपये सरकार खर्च का सही हिसाब नहीं दे पा रही है. किसानों की स्थिति खराब है, आरक्षित वर्ग पर अत्याचार के मामले बढ़े हैं, और राज्य कर्ज़ और अपराध में शीर्ष पर पहुंच गया है.
प्रदेश को कर्ज का गढ़ बना दिया
पटवारी ने कहा कि सरकार ने प्रदेश को कर्ज़ का गढ़ बना दिया, अपराध की राजधानी बना दी, किसानों को 97 प्रतिशत तक कर्ज़दार कर दिया और युवाओं को बेरोज़गार छोड़ दिया. इसके बावजूद मुख्यमंत्री ताली बजवा रहे हैं और जश्न मना रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि दो साल में सरकार पूरी तरह फेल हो गई है.
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कांग्रेस का कहना है कि भाजपा सत्र को चलने नहीं देती और सवालों से बचती है. पार्टी ने साफ किया है कि सोमवार से विधानसभा में हर मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा. शीतकालीन सत्र छोटे समय का जरूर है, लेकिन विपक्ष की रणनीति से स्पष्ट है कि सदन में तीखी बहस और टकराव देखने को मिल सकता है.
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