Madhya Pradesh Weather Update: मध्य प्रदेश में कड़ाके की सर्दी का दौर अभी भी जारी है. उत्तर भारत से बर्फीली हवा आने से मध्य प्रदेश में न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है. बीती रात 4 शहरों का पारा 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा. शुक्रवार की सुबह प्रदेश के कई हिस्सों में कोहरे का असर देखने को मिला.
मौसम विभाग के मुताबिक,ग्वालियर-चंबल, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में सबसे ज्यादा ठंड का असर रहा है. यहां के जिलों में मध्यम से घना कोहरा भी छा रहा है.
मौसम विभाग के अनुसार, शहडोल में गुरुवार-शुक्रवार की रात पारा गिरकर 4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया. जिससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ. सुबह के समय दृश्यता बहुत कम हो गई, जिसका सीधा असर सड़क और रेल यातायात पर पड़ा. सड़कों पर वाहनों की गति धीमी हो गई और चालकों को हेडलाइट जलाकर सावधानी से यात्रा करनी पड़ी. कई स्थानों पर वाहन धीमी गति से चलते दिखे, जिससे यात्रियों को गंतव्य तक पहुंचने में अधिक समय लगा.
Madhya Pradesh Weather Update: लोग ले रहे हैं अलाव का सहारा.
इस सीजन में सबसे ठंडा शहडोल जिला रहा. यहां दिसम्बर माह की शुरुआत से ही तेज ठंड पड़ रही है. बता दें कि लगातार कई दिनों से यहां का न्यूनतम तापमान 4 से 5 डिग्री सेल्सियस बना हुआ है.
शहडोल में तेज शीत लहर ने जन जीवन को अस्त व्यस्त कर दिया. आज सुबह न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया. दिन भर तेज धूप के बावजूद शाम होते ही शीत लहर और ठंड तेज हो जाती है. हाड़ कंपाने वाली ठंड में सुबह-सुबह लोगों का घरों से निकलना मुश्किल हो गया है. शाम होते ही ठंड और तेज हो जाती है. ठंड से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं.
Madhya Pradesh Weather Update: सड़कों पर थम गई वाहनों की रफ्तार.
उत्तर भारत में जारी कड़ाके की ठंड का असर शाजापुर में भी देखने को मिल रहा है. यहां पर भी सर्द हवाओं ने जनजीवन को खासा प्रभावित कर रखा है. बीते कुछ दिनों में राहत के बाद एक बार फिर से ठंड अपना असर दिख रही है. बीती रात भी यहां पर तापमान 7.7 डिग्री दर्ज किया गया. वहीं सुबह घना कोहरा देखने को मिला, जिससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. मौसम विभाग की माने तो आने वाले दिनों में तापमान में बढ़ोतरी तो होगी, लेकिन घने कोहरे की मार अभी और झेलना होगी.
टीकमगढ़ जिले में भी अब सुखी ठंड ने लोगों को परेशानियों में डाल दिया, जिससे लोग बेहद परेशान है. हाड़ कपाने वाली सुखी ठंड कुहरा, बर्फवारी और शीतलहर वाली ठण्ड से कही ज्यादा खतरनाक होती है. इससे शरीर मे अकड़न होती हाथ पैर सुन्न होते और पूरा शरीर अकड़ने लगता है. जिससे किसानों और ग्रामीणों को खेतो पर जाने में दिक्क़त होती है. हालांकि
बुंदेलखंड में ठंडक और शीतलहर मुख्य रूप से पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर भारत से आने वाली ठंडी हवाओं के कारण होती है.मखासकर जब पहाड़ों पर बर्फबारी होती है; साथ ही, क्षेत्र की ग्रेनाइट चट्टानों और पथरीली मिट्टी के कारण गर्मी और सर्दी दोनों का असर तीव्र होता है, जिससे मौसम में अचानक बदलाव महसूस होता है और रात-सुबह घना कोहरा छा जाता है, जिससे जनजीवन प्रभावित होता है.
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