Ujjain Simhastha 2028: सिंहस्थ से पहले अखाड़ों में ‘कुर्सी संग्राम’, अध्यक्ष पद पर संतों के बीच वर्चस्व की जंग 

Akhada Parishad President Controversy को लेकर उज्जैन में साधु-संतों के बीच वर्चस्व की लड़ाई तेज हो गई है. Ujjain Simhastha 2028 से पहले अध्यक्ष पद पर खींचतान खुलकर सामने आ रही है.

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Ujjain Simhastha 2028: मध्यप्रदेश के उज्जैन में जैसे-जैसे सिंहस्थ 2028 नजदीक आ रहा है. साधु-संतों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी तेज होती जा रही है. इसका सीधा असर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर जारी विवाद में दिख रहा है.

अध्यक्ष पद को लेकर बढ़ी खींचतान

हाल ही में महानिर्वाणी अखाड़े के संत रविंद्र पुरी ने दावा किया था कि देश के 13 अखाड़ों में से 8 अखाड़ों का समर्थन उन्हें हासिल है. उन्होंने यह भी कहा कि सभी उन्हें अध्यक्ष मानते हुए उनके नेतृत्व में सिंहस्थ 2028 में शामिल होंगे.

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निरंजनी अखाड़े की ओर से तंज

इस दावे के बाद उज्जैन में आयोजित कन्या पूजन कार्यक्रम के दौरान अखाड़ा परिषद के मौजूदा अध्यक्ष, निरंजनी अखाड़े के संत रविंद्र पुरी ने बिना नाम लिए तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि “नासिक में भंडारे के नाम पर अध्यक्ष बन गए. जब किसी को पद नहीं मिलता, तो उनकी मानसिकता कमजोर हो जाती है.”

प्रयागराज कुंभ के बाद होगा फैसला

अध्यक्ष पद को लेकर जारी विवाद पर उन्होंने साफ कहा कि असली पहचान प्रयागराज कुंभ से होती है और कुछ लोग कुंभ की गरिमा को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष का चुनाव प्रयागराज कुंभ के बाद कराया जाएगा. ऐसे में संकेत मिल रहे हैं कि सिंहस्थ 2028 से पहले ही अखाड़ा परिषद में नेतृत्व को लेकर बड़ा फैसला हो सकता है.

सिंहस्थ से पहले चुनाव के आसार

नासिक कुंभ के बाद उज्जैन में सिंहस्थ 2028 का आयोजन होना है. ऐसे में उससे पहले अखाड़ा परिषद के चुनाव होने की संभावना जताई जा रही है. फिलहाल संतों के बीच बयानबाजी से साफ है कि आने वाले समय में यह विवाद और गहरा सकता है.

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