उज्जैन में 100 साल पुराने रथ पर निकले भगवान जगन्नाथ, पहली बार 3 रथों पर विराजे प्रभु, बलदेव और सुभद्रा 

उज्जैन में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली. इस्कॉन मंदिर ने पहली बार भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा को तीन अलग-अलग रथों पर विराजमान किया, जबकि 100 साल पुराने पारंपरिक लकड़ी के रथ ने श्रद्धालुओं का ध्यान खींचा.

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धर्मनगरी उज्जैन में आषाढ़ शुक्ल द्वितीया का पर्व इस बार खास भक्ति, उत्साह और परंपरा के रंग में रंगा नजर आया. भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा के दौरान पूरा शहर जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंज उठा. इस वर्ष श्रद्धालुओं के लिए सबसे बड़ा आकर्षण यह रहा कि इस्कॉन मंदिर ने पहली बार भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलदेव और बहन सुभद्रा को तीन अलग-अलग रथों पर विराजमान कर रथ यात्रा निकाली. 

वहीं दूसरी ओर कार्तिक चौक स्थित भगवान जगदीश मंदिर से निकले करीब 100 साल पुराने पारंपरिक लकड़ी के रथ ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. दोनों यात्राओं में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और भगवान के रथ को खींचकर आशीर्वाद प्राप्त किया.

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पहली बार तीन अलग-अलग रथों पर विराजे भगवान

उज्जैन में इस्कॉन मंदिर द्वारा निकाली गई रथ यात्रा इस बार विशेष रही. दोपहर करीब 2 बजे इंदिरा नगर चौराहे से यात्रा की शुरुआत हुई. इसमें भगवान जगन्नाथ को 35 फीट ऊंचे नंदीघोष रथ पर, बलदेव को तालध्वज रथ पर और सुभद्रा जी को दर्पदलन रथ पर विराजमान किया गया. यात्रा के दौरान भजन-कीर्तन, हरिनाम संकीर्तन और जय जगन्नाथ के उद्घोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा.  

खास पोशाक में सजे भगवान जगन्नाथ

इस्कॉन मंदिर के पीआरओ राघव पंडित दास प्रभु के अनुसार भगवान को इस अवसर पर विशेष पोशाक धारण कराई गई. यह पोशाक जापान से मंगाए गए विशेष धागों और मोतियों से तैयार की गई थी. करीब ढाई लाख रुपये की लागत से बनी इस पोशाक को बंगाल के कारीगरों ने तैयार किया था. आकर्षक श्रृंगार में भगवान के दर्शन करने के लिए रास्ते भर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही.

इन प्रमुख मार्गों से निकली यात्रा

रथ यात्रा इंदिरा नगर चौराहे से शुरू होकर मंडी चौराहा, चामुंडा माता मंदिर, फ्रीगंज ब्रिज, टॉवर चौक और तीन बत्ती क्षेत्र से होती हुई विक्रमादित्य शोधपीठ पहुंची. यहां भगवान की विशेष आरती की गई और मोर पंख तथा चंवर से सेवा अर्पित की गई. उल्लेखनीय है कि इस्कॉन मंदिर वर्ष 2007 से उज्जैन में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का आयोजन करता आ रहा है.

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100 साल पुराने रथ पर सवार हुए भगवान जगदीश

उधर कार्तिक चौक स्थित भगवान जगदीश मंदिर से खाती समाज की पारंपरिक रथ यात्रा भी पूरे श्रद्धाभाव के साथ निकाली गई. यात्रा से पहले भगवान जगदीश का अभिषेक और महाआरती की गई. इसके बाद भगवान की प्रतिमा को करीब 100 वर्ष पुराने लकड़ी के रथ में विराजमान कराया गया. वर्षों पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. रथ यात्रा में शामिल लोगों के लिए यह सबसे बड़ा आकर्षण रही.

1200 गांवों से पहुंचे समाजजन

खाती समाज की रथ यात्रा में दूर-दूर से समाजजन शामिल हुए. बताया गया कि करीब 1200 गांवों से श्रद्धालु और समाज के लोग उज्जैन पहुंचे थे. श्रद्धालुओं ने अपने हाथों से रथ खींचते हुए भगवान जगदीश का नगर भ्रमण कराया. यात्रा कार्तिक चौक, गणगौर दरवाजा, दानी गेट, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, गुदरी चौराहा और पानदरीबा क्षेत्र से होकर वापस मंदिर पहुंची.

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