बाबा महाकाल को आज से ठंडे पानी की जलधारा अर्पित, गर्मी से राहत के लिए शिवलिंग पर बांधे 11 कलश

Ujjain Baba Mahakal: गर्मी की शुरुआत के साथ ही बाबा महाकाल को शीतलता प्रदान करने की परंपरा शुरू हो गई है. इस विशेष अनुष्ठान में 11 मिट्टी के कलशों से जलधारा चढ़ाई जाती है. इन कलशों में गंगा, यमुना, कावेरी, सरयू, नर्मदा, गोदावरी, क्षिप्रा सहित प्रमुख पवित्र नदियों का जल स्थापित किया गया है.

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Mahakaleshwar Temple: मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल को अब गर्मी से राहत मिलेगी. शुक्रवार, 3 मार्च की सुबह से शिवलिंग पर बांधे गए 11 कलशों से जल धारा अर्पित करना शुरू कर दी गई है. यह 11 नदियों के नाम से बांधे गए. इन मिट्टी के कलश से जलधारा तीन माह तक अर्पित होती रहेगी.

बाबा महाकाल को आज से ठंडे पानी की जलधारा अर्पित

बाबा महाकाल को गर्मी से बचाने के लिए बुधवार को 11 कलश (गलंतियां ) शिवलिंग पर बांधी गई. 11 नदियों के नाम पर बांधे इन कलश से 3 अप्रैल वैशाख कृष्ण प्रतिपदा) प्रातः 6 बजे से जल धारा शिवलिंग पर शुरू हो गई, जो 29 जून (ज्येष्ठ पूर्णिमा) तक सतत बहेगी. दरअसल, मान्यता है कि गर्मी के मौसम में आम इंसान की तरह भगवान को भी गर्मी लगती है. इसीलिए जलधारा अर्पित करने की परंपरा है.

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11 मटकियों से बह रही धारा

मंदिर के आशीष पुजारी ने बताया कि भगवान के मस्तक पर रखी 11 मटकियों से रक्षा सूत्र के माध्यम से बूंदे गिरती हैं. यह बाबा महाकाल को गर्मी से राहत देती है. इससे भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति भी होती है.

इन नदियों के नाम पर कलश 

मंदिर की प्राचीन परंपरा के अनुसार, बाबा महाकाल को ठंडक के लिए बांधे गए कलशों पर देश की प्रमुख 11 नदियों के नाम लिखे हैं. इनमें गंगा, सिंधु, सरस्वती, यमुना,गोदावरी, नर्मदा, कावेरी, शरयु, शिप्रा और गण्डकी शामिल हैं. इन नदियों का स्मरण,आव्हान और ध्यान मंत्रों का जाप कलश स्थापित किए, जिनसे बाबा पर निरंतर शीतल जलधारा अर्पित होना शुरू हो गया. यह अभिषेक प्रतिदिन प्रातः से सायंकालीन पूजन तक जारी रहेगा.

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