ट्विशा शर्मा मौत का मामला अब सीबीआई (केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो - Central Bureau of Investigation) के हवाले हो गया है. आज सोमवार 25 मई को सीबीआई इसे लेकर केस दर्ज कर जांच शुरू कर सकती है. सूत्रों का कहना है कि DOPT से नोटिफिकेशन मिलते ही यह कार्रवाई की जाएगी. केस की जांच को लेकर एसआईटी बनाने समेत आगे की अन्य कवायद शुरू हो गई है.
बता दें कि 12 मई को ट्विशा शर्मा की मौत के बाद से यह मामला लगातार सुर्खियों में हैं. मध्य प्रदेश सरकार ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी. मामले में सीबीआई की जांच का रास्ता साफ हो गया है. कहा जा रहा है कि सीबीआई केस की जांच के दौरान साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी करवा सकती है.
दिल्ली-एमपी के अधिकारियों की एसआईटी बनेगी
जानकारी के अनुसार, सीबीआई ट्विशा शर्मा केस को लेकर कटारा हिल्स थाने में एफआईआर दर्ज करेगी. केस की जांच के लिए सीबीआई के दिल्ली और मध्यप्रदेश के अधिकारियों की एक एसआईटी बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई. दिल्ली के अधिकारियों की टीम कल 26 मई को भोपाल पहुंच सकती है. इसके बाद सीबीआई की टीम पुलिस से आरोपी पति समर्थ सिंह की कस्टडी लेगी और उसके पूछताछ करेगी. सास गिरिबाला सिंह और ट्विशा शर्मा के बयान दर्ज किए जाएंगे.
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क्या है साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी?
साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी (Psychological Autopsy) किसी व्यक्ति की मृत्यु, विशेषकर आत्महत्या या संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के कारणों का पता लगाने की एक फोरेंसिक प्रक्रिया है. इसमें उसके मानसिक और भावनात्मक स्तर की जांच की जाती है. इसे 'मनोवैज्ञानिक शव परीक्षण' भी कहा जाता है. इसके जांच एजेंसियां और मनोचिकित्सक मृतक के दिमाग को पढ़ने और यह समझने की कोशिश करते हैं कि मौत से पहले उनके मन में क्या चल रहा था?
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इस प्रक्रिया में क्या-क्या शामिल होता है?
मृतक की डायरी, सुसाइड नोट (यदि हो), मेडिकल रिकॉर्ड और प्रिस्क्रिप्शन की पड़ताल की जाती है. मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट, कॉल डिटेल और सोशल मीडिया अकाउंट्स पर की गई एक्टिविटी का विश्लेषण किया जाता है. करीबियों, परिवार के सदस्यों, दोस्तों और सहकर्मियों के साक्षात्कार लिए जाते हैं ताकि मृतक के व्यवहार में आए बदलाव, तनाव या पिछली आदतों को समझा जा सके. मरने से 1-2 सप्ताह पहले व्यक्ति के दैनिक रूटीन और मानसिक स्थिति पर विशेष ध्यान दिया जाता है.