Swadeshi Se Swavlamban Abhiyan: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की मौजूदगी में कुशाभाऊ ठाकरे सभागार, भोपाल में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद एवं स्वदेशी जागरण मंच के संयुक्त तत्वावधान में 'स्वदेशी से स्वाबलंबन' विषय पर आयोजित राज्य स्तरीय संगोष्ठी का दीप शुभारंभ हुआ. इस कार्यक्रम में मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद और स्वदेशी जागरण मंच के बीच नागरिकों में स्वदेशी की भावना जाग्रत कर देश को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए अभियान चलाने के संबंध में समझौता ज्ञापन (MOU) का आदान- प्रदान किया गया. वहीं सीएम ने स्वदेशी अभियान के पोस्टर एवं जन अभियान परिषद के ब्रोशर का विमोचन भी किया.
राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस की बधाई
भोपाल में आयोजित स्वदेशी से स्वावलंबन संगोष्ठी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि "आज एक साथ दो सुखद संयोग हैं. आज राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस भी है. मेरी अपनी ओर से स्वदेशी से स्वावलंबन की इस कार्यशाला को भावनात्मक आधार पर और भी अधिक सार्थकता प्रदान करने के लिए प्रदेशवासियों को बधाई देता हूं. वैश्विक स्तर पर आज हर देश यह समझ रहा है कि इस दौर में स्वदेशी की भावना ही सबसे आवश्यक है. सारे उलझे-सुलझे प्रश्नों का उत्तर केवल एक है – स्वदेशी की भावना.
मुख्यमंत्री ने दिलाया स्वदेशी का संकल्प
सीएम ने कहा कि "मैं संकल्प करता हूं कि अपने देश को समृद्ध एवं विकसित राष्ट्र बनाने के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करूंगा. मैं स्वदेशी से स्वावलंबी संकल्प शक्ति हेतु स्वदेशी उत्पादों की खरीदारी करूंगा. उनका उपयोग करने के लिए मैं अपने मित्रों परिवार जनों एवं समाज को स्वदेशी उत्पादों के बारे में जागरूक करूंगा. स्वदेशी उत्पादों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए जनसंचार के माध्यमो का उपयोग करूंगा. मैं अपने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का प्रयत्न करूंगा.
CM ने कहा कि "परमात्मा की दया है कि हमारा कल्चर शुरू से ही स्वदेशी की भावना पर आधारित रहा है. जिसे जो आवश्यकता होती थी, वह सब गाँव में ही मिल जाता था. आज टेक्नोलॉजी बदली है, लेकिन तब भी भारतीय टेक्नोलॉजी धूम मचा रही है. हमसे ज्यादा पाकिस्तान से पूछना चाहिए कि हमारे स्वदेशी का क्या हाल है. हमारी नीतियाँ अपने आप बोलती हैं. हम कुछ नहीं कहते, लेकिन हमारे पास विकल्प है – और यह विकल्प स्वदेशी है. आज जब हम दुनिया की तीसरी ताकत बनने की ओर बढ़ रहे हैं, तो इसमें देश के अंदर सबसे बड़ा योगदान हमारी जीवन-शैली का है."
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि "1235 में जब हम कमजोर थे तो महाकाल का मंदिर तोड़ दिया गया था. हमारे शासक मजबूत हुए तो ढाई सौ साल बाद मंदिर पुनः बन गया. पिछले साल का आंकड़ा है कि 7 करोड़ लोग अकेले उज्जैन में आए. हमारे राज्यों की सीमाएँ चाहे सीमित हों, लेकिन हमारी सांस्कृतिक धारा हमें स्वदेशी के भाव के आधार पर उस दौर में ले जाती है और देश की आंतरिक ताकत को मजबूत करती है. एक ओर हमने धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास किया और दूसरी ओर अपने जंगलों को जानवरों से आबाद कर रहे हैं. आज रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव हमने ग्वालियर बेल्ट में किया है, इससे पहले रीवा में किया था. हम बड़े से बड़े उद्यमी को भी बढ़ावा देंगे, लेकिन जो उद्योग रोजगार आधारित होगा, उसे विशेष लाभ देंगे. अगर कोई रोजगार आधारित उद्योग लगाएगा तो उसे 5000 रुपये प्रति लेबर 10 साल तक हमारी सरकार देंगी."
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