Success Story: गाड़ी के बजाए साइकिल से पहुंचते हैं ऑफिस, सादगी है इनकी पहचान... जानिए सागर के SP दिनेश कौशल की कहानी

SP Dinesh Kumar Kaushal Success Story: सागर के एसपी दिनेश कुमार कौशल 1998 बैच के अधिकारी हैं. कम संसाधनों के बावजूद उन्होंने सरकारी स्कूल से पढ़ाई कर इस मुकाम को हासिल की. उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. साथ ही मध्य प्रदेश पुलिस का प्रतिष्ठित ‘रुस्तम जी पुरस्कार’ से नवाजा गया है.

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SP Dinesh Kumar Kaushal: सादगी और फिटनेस से बन रहे मिसाल

SP Dinesh Kumar Kaushal Inspirational Story: मध्य प्रदेश के सागर जिले में इन दिनों एक पुलिस अधिकारी हर किसी की जुबान पर हैं. वजह है उनकी अनोखी जीवनशैली, फिटनेस के प्रति समर्पण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता... विशेष पुलिस शाखा के पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार कौशल अपनी सादगी और अनुशासन के चलते लोगों के बीच खास पहचान बना चुके हैं. आमतौर पर बड़े पदों पर बैठे अधिकारियों की पहचान उनकी आलीशान गाड़ियों और सुविधाओं से होती है, लेकिन एसपी दिनेश कौशल (SP Dinesh Kumar Kaushal) ने इस परंपरा को तोड़ते हुए एक अलग ही मिसाल पेश की है. वो सरकारी महंगी गाड़ियों का उपयोग छोड़कर साइकिल से ही ऑफिस पहुंचते हैं. इतना ही नहीं, अपने दैनिक कार्यों को भी वे पैदल या साइकिल से ही पूरा करते हैं.

SP साइकिल से पहुंचते हैं ऑफिस

उनकी यह पहल सिर्फ एक व्यक्तिगत आदत नहीं, बल्कि समाज को दिया जा रहा एक संदेश है. वो लोगों को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि पर्यावरण संरक्षण और स्वास्थ्य दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और प्रदूषण की समस्या के बीच उनका यह कदम लोगों को प्रेरित कर रहा है.

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SP Dinesh Kumar Kaushal Success Story: सरकारी गाड़ियों की बजाय साइकिल से पहुंचते हैं ऑफिस.

50 की उम्र में 25 जैसा जोश

दिनेश कौशल बताते हैं कि पुलिस की व्यस्त नौकरी के शुरुआती दौर में वे खुद के स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाते थे. लंबे समय तक बैठकर काम करना और अनियमित दिनचर्या उनके लिए चुनौती बन गई थी. इसी के बाद उन्होंने अपने जीवन में बदलाव लाने का निर्णय लिया और साइकिल को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया. इस बदलाव का असर आज साफ नजर आता है. 50 वर्ष की उम्र में भी उनकी फिटनेस और ऊर्जा युवाओं को मात देती है. वो बताते हैं कि उन्होंने आज तक किसी प्रकार की दवाइयों का सहारा नहीं लिया और नियमित व्यायाम व साइकिलिंग के जरिए खुद को स्वस्थ बनाए रखा है.

सादगी भरी जीवनशैली जीते हैं SP

एसपी कौशल की खास बात यह भी है कि वे सिर्फ दिखावे के लिए नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से इस जीवनशैली को जीते हैं. वो कई बार पुलिस चेकिंग और निरीक्षण के लिए भी साइकिल से ही पहुंच जाते हैं. जब लोग एक वरिष्ठ अधिकारी को इस तरह सादगी के साथ काम करते देखते हैं, तो उन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

Photo Credit: SP Dinesh Kumar Kaushal Success Story: साइकिल से ही पहुंच जाते हैं औचक निरीक्षण करने.

1998 बैच के हैं अधिकारी

उनकी इस पहल का असर अब आम नागरिकों में भी देखने को मिल रहा है. कई लोग साइकिलिंग को अपनी दिनचर्या में शामिल कर रहे हैं और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं. साथ ही पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है. दिनेश कुमार कौशल का पुलिस करियर भी काफी प्रभावशाली रहा है. वे भोपाल, ग्वालियर और सागर सहित कई जिलों में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वर्ष 1998 बैच के अधिकारी कौशल ने अपनी पढ़ाई छतरपुर के एक सरकारी स्कूल से पूरी की. सीमित संसाधनों में शिक्षा प्राप्त कर उन्होंने यह मुकाम हासिल किया, जो युवाओं के लिए प्रेरणादायक है.

कई बार हो चुके हैं सम्मानित

विशेष बात यह है कि वे अपने बैच के एकमात्र अधिकारी हैं जिन्होंने डी.एल.ई.टी. की डिग्री प्राप्त की है. उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका है. इसके अलावा मध्य प्रदेश पुलिस का प्रतिष्ठित ‘रुस्तम जी पुरस्कार' भी उन्हें मिल चुका है. आज के दौर में जहां लोग सुविधाओं की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं, वहीं एसपी दिनेश कौशल अपनी सादगी, अनुशासन और पर्यावरण प्रेम के जरिए एक अलग राह दिखा रहे हैं. वे साबित कर रहे हैं कि अगर इच्छा शक्ति मजबूत हो, तो जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना मुश्किल नहीं है.

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