Success Story: मध्य प्रदेश के रतलाम जिले के कुशगढ़-पिपलोदा गांव की किसान मधुबाला पाटीदार की सक्सेस स्टोरी उन किसानों के लिए प्रेरणा है जो पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर कुछ नया करना चाहते हैं. कभी सोयाबीन, चना और गेहूं जैसी फसलों से सीमित आमदनी पाने वाली मधुबाला की जिंदगी आज गुलाब से महक उठी है और सालाना तगड़ी कमाई भी हो रही है. पॉलीहाउस तकनीक से गुलाब की खेती करे वाली मधुबाला का सालाना टर्नओवर करीब 25 लाख रुपये तक पहुंच गया है.
Madhubala Patidar: रतलाम से दिल्ली तक आते गुलाब
रतलाम पीआरओ के अनुसार मधुबाला पाटीदार ने बताया कि वह खेत में न केवल गुलाब उगाती ही है बल्कि उनकी मार्केटिंग पर विशेष ध्यान रखती है. उनके द्वारा उगाए गए गुलाब एमपी में रतलाम के अलावा भोपाल और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में भी भेजे जाते हैं. बेहतर गुणवत्ता और नियंत्रित वातावरण में उत्पादन होने के कारण उन्हें अच्छे दाम मिलते हैं. कुल आय में से मजदूरी और अन्य खर्च निकालने के बाद उन्हें 12 से 13 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हो रहा है.
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पहले तो लागत भी नहीं निकलती थी, अब जोरदार मुनाफा
मधुबाला बताती हैं कि पहले उनके खेत उबड़-खाबड़ थे और प्रति बीघा लगभग 2 क्विंटल सोयाबीन उत्पादन होता था, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल था. इसी दौरान उन्हें मध्य प्रदेश उद्यानिकी विभाग से पॉलीहाउस तकनीक की जानकारी मिली. सरकारी योजना के तहत आर्थिक सहायता प्राप्त कर उन्होंने 2 बीघा भूमि में पॉलीहाउस स्थापित किया और गुलाब की खेती शुरू की. शुरुआत सफल रही और उनकी आय में कई गुना वृद्धि हो गई.
Gulab ki Kheti: गुलाब के साथ ककड़ी की भी खेती
रतलाम में गुलाब की खेती मास्टनी कही जाने वाली मधुबाला पाटीदार ने सफलता से उत्साहित होकर अपने खेत का विस्तार किया और अब 15 से 16 बीघा क्षेत्र में पॉलीहाउस स्थापित कर गुलाब के साथ ककड़ी की भी खेती कर रही हैं. खाद, कीट और रोग प्रबंधन से जुड़ी जानकारी उन्हें मोबाइल के माध्यम से समय पर मिल जाती है, जिससे उत्पादन बेहतर बना रहता है.
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