कुत्तों का आतंक बेलगाम, रोजाना डॉग बाइट्स के 100 मामले आ रहे हैं सामने, डॉक्टरों ने दी ये सलाह

शिवपुरी जिले में आवारा कुत्तों के हमले बढ़ते जा रहे हैं. रोजाना 100 से ज्यादा लोग स्ट्रीट डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं. जिला अस्पताल के अनुसार दिसंबर में 419 डॉग बाइट के केस सामने आए, जबकि जनवरी में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं.

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Street Dog Bite Cases India: मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में आवारा कुत्तों की संख्या और उनके हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. हालात ऐसे हैं कि हर दिन बड़ी संख्या में लोग स्ट्रीट डॉग बाइट का शिकार हो रहे हैं. बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक, कोई भी इससे अछूता नहीं है. जिला अस्पताल के आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को साफ दिखाते हैं, जहां रोजाना दर्जनों मरीज सिर्फ एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंच रहे हैं.

जिले में बढ़ते डॉग बाइट के मामले

शिवपुरी जिले में आवारा कुत्तों के काटने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. इसमें सिर्फ स्ट्रीट डॉग ही नहीं, बल्कि घरों में पाले गए कुत्ते और बिल्लियां भी शामिल हैं. जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 50 मरीज डॉग बाइट के इंजेक्शन लगवाने आते हैं. डॉक्टरों के मुताबिक यह आंकड़ा केवल जिला अस्पताल तक सीमित है, जबकि पूरे जिले में डॉग बाइट के शिकार लोगों की संख्या इससे कहीं अधिक है.

हर दिन 100 से ज्यादा लोग शिकार

स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, पूरे शिवपुरी जिले में हर रोज़ लगभग 100 से ज्यादा लोग आवारा कुत्तों के काटने का शिकार हो रहे हैं. इनमें से कई लोग आसपास के स्वास्थ्य केंद्रों या निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं, जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड सामने नहीं आता. यही वजह है कि वास्तविक आंकड़े और भी ज्यादा होने की आशंका जताई जा रही है.

दिसंबर महीने में डॉग बाइट के 419 मामले

जिला अस्पताल के रिकॉर्ड बताते हैं कि दिसंबर माह में अकेले 419 नए डॉग बाइट के केस दर्ज किए गए. यानी हर दिन औसतन 14 मरीज जिला अस्पताल पहुंचे. इसके अलावा दिसंबर में बिल्लियों के काटने के 39 मामले सामने आए, जिनमें अधिकतर पालतू बिल्लियों से जुड़े थे. वहीं बंदरों के काटने के 8 और जंगली जानवरों के हमले के 10 केस भी दर्ज किए गए.

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जंगली जानवरों के हमले भी बढ़ा रहे डर

दिसंबर में दर्ज जंगली जानवरों के हमलों में सतनबाड़ा थाना क्षेत्र के डोंगर गांव में एक बुजुर्ग पर मादा टाइगर के हमले का मामला भी शामिल है. यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि जिले में सिर्फ आवारा जानवर ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों के हमले भी चिंता का विषय बनते जा रहे हैं.

जनवरी में भी हालात चिंताजनक

नए साल की शुरुआत में भी स्थिति में कोई सुधार नहीं दिख रहा है. जनवरी के सिर्फ 17 दिनों में ही डॉग बाइट के नए मामलों की संख्या 250 के पार पहुंच चुकी है. लगातार बढ़ते इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन की परेशानी बढ़ा दी है.

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पीड़ितों की आपबीती

डॉग बाइट का शिकार हुए बुजुर्ग शुगर सिंह ने बताया कि अचानक हमला होने से खुद को संभालने का मौका भी नहीं मिला. ऐसे कई लोग हैं जिन्हें रोजमर्रा के काम के दौरान आवारा कुत्तों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे डर और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है.

डॉक्टरों की जरूरी सलाह

जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि कुत्ते, बिल्ली या किसी भी जानवर के काटने की घटना को हल्के में नहीं लेना चाहिए. काटने के तुरंत बाद घाव को साबुन और साफ पानी से 10 से 15 मिनट तक धोना बेहद जरूरी है. किसी भी तरह के घरेलू नुस्खे लगाने से बचें और तुरंत नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंचकर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाएं. डॉक्टरों के मुताबिक रेबीज एक जानलेवा बीमारी है, लेकिन समय पर उपचार से इससे पूरी तरह बचाव संभव है.

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पालतू जानवरों के टीकाकरण पर जोर

डॉक्टरों ने यह भी सलाह दी है कि जिनके घर में पालतू कुत्ते या बिल्लियां हैं, उनके नियमित टीकाकरण को नजरअंदाज न करें. समय पर वैक्सीनेशन न सिर्फ जानवरों को सुरक्षित रखता है, बल्कि लोगों को भी गंभीर बीमारी से बचाता है.

बड़ी चिंता का विषय बना डॉग बाइट

सरकारी जिला अस्पताल से जारी आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि डॉग बाइट की समस्या तेजी से गंभीर होती जा रही है. रोजाना 100 से ज्यादा मामले सामने आना प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है. समय रहते ठोस कदम उठाए नहीं गए, तो हालात और भी गंभीर हो सकते हैं.