PWD Road Corruption: सतना में एक बार फिर खुली PWD की पोल; तीन दिन में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ये सड़क

PWD Road Corruption: ग्रामीणों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उनका कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार को रोका जा सके. सड़क की यह स्थिति न केवल सरकारी सिस्टम की खामियों को उजागर करती है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और सुविधा पर भी सीधा असर डालती है.

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PWD Road Corruption: सतना में एक बार फिर खुली PWD की पोल; तीन दिन में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ये सड़क

Satna PWD Road Corruption: सतना जिले में बरौंधा से पिण्डरा मार्ग पर लोक निर्माण विभाग (PWD) की लापरवाही और भ्रष्टाचार की पोल खुल गई है. विभाग द्वारा इस सड़क की मरम्मत का कार्य महज तीन दिन पहले ही पूरा किया गया था, लेकिन सड़क की हालत देखकर ग्रामीणों में आक्रोश है. नई बनी सड़क पर जगह-जगह गहरी दरारें पड़ गई हैं और डामर की परतें उखड़ने लगी हैं. कई स्थानों पर सड़क पूरी तरह कट-फट गई है, जिससे यह किसी पुरानी और जर्जर सड़क जैसी दिख रही है.

क्या हैं आरोप?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया. उनका कहना है कि कमीशनखोरी के चलते सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग हुआ है. वीडियो फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि सड़क की स्थिति बेहद खराब है, जो विभाग की कार्यप्रणाली और ठेकेदार द्वारा इस्तेमाल की गई सामग्री पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

ग्रामीणों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है. उनका कहना है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही और भ्रष्टाचार को रोका जा सके. सड़क की यह स्थिति न केवल सरकारी सिस्टम की खामियों को उजागर करती है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और सुविधा पर भी सीधा असर डालती है.

इससे पहले इस सड़का पर मचा था हंगामा

इस मामले से पहले सतना में राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी (Pratima Bagri) के द्वारा पैर से सड़क कुरेदने पर रोड में बिछाई गई डामर के उखड़ने को लेकर प्रदेश के पीडब्ल्यूडी (PWD Minister) मंत्री के पास शिकायत पहुंची थी. तब निर्माण एजेंसी पीडब्ल्यूडी (PWD) विभाग एक्शन मोड़ में आ गया था. पीडब्ल्यूडी के कार्यपालन यंत्री सतना बीआर सिंह द्वारा 21 दिसंबर को भेजे गए प्रस्ताव के आधार पर संभागीय अधीक्षण यंत्री रीवा केके लक्षे ने ठेकेदार राजेश कुमार कैला के पंजीयन को एक वर्ष के लिए निरस्त कर दिया था. साथ ही साथ शासकीय निर्माण से जुड़े टेंडर प्रक्रिया में शामिल होने पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

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