प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ोतरी पर लगा ब्रेक, सतना निगम का ₹4.66 अरब का बजट हंगामे के बीच पास

सतना नगर निगम का वित्तीय वर्ष 2026‑27 का ₹4.66 अरब का बजट हंगामे के बीच पारित हुआ. बैठक के दौरान महापौर योगेश ताम्रकार ने प्रॉपर्टी टैक्स में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी का प्रस्ताव वापस लेकर सभी को चौंका दिया. बजट में ₹19.66 करोड़ का घाटा दर्शाया गया.

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Satna Municipal Budget 2026: सतना नगर निगम की परिषद बैठक मंगलवार को काफी हंगामेदार रही. वित्तीय वर्ष 2026‑27 का बजट पेश होते ही सदन में जोरदार बहस शुरू हो गई. खास बात यह रही कि प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव को ऐन वक्त पर वापस लेकर महापौर ने सभी को चौंका दिया. हंगामे और तू‑तू, मैं‑मैं के बीच आखिरकार नगर निगम का 4 अरब 66 करोड़ 66 लाख रुपये का बजट पास कर दिया गया, जिसमें 19 करोड़ 66 लाख रुपये का घाटा दिखाया गया है.

₹4.66 अरब का बजट, 19.66 करोड़ का घाटा

नगर निगम सतना ने वर्ष 2026‑27 के लिए 4 अरब 66 करोड़ 66 लाख रुपये की अनुमानित आय का बजट पेश किया. इस बजट में 19 करोड़ 66 लाख रुपये का घाटा बताया गया. बजट चर्चा के दौरान पक्ष‑विपक्ष के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी रही, लेकिन अंत में बहुमत के आधार पर बजट पारित कर दिया गया.

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प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव लिया वापस

बैठक की शुरुआत में प्रॉपर्टी टैक्स में 10 प्रतिशत बढ़ोतरी को लेकर हंगामा होने की पूरी संभावना थी. यह प्रस्ताव 9 जनवरी को मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) की बैठक में लिया गया था. लेकिन महापौर योगेश ताम्रकार ने सदन में घोषणा करते हुए यह फैसला वापस ले लिया. उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में करीब 26 करोड़ रुपये की टैक्स वसूली हुई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत से अधिक है. इसी आधार पर टैक्स बढ़ाने की जरूरत नहीं समझी गई.

राजस्व वसूली पर विपक्ष के सवाल

बजट चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष रवीन्द्र सिंह मिथलेश ने राजस्व वसूली पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि सदन को बताया गया कि 26 करोड़ रुपये की वसूली हुई, लेकिन यह नहीं बताया गया कि लक्ष्य कितना था. उनका आरोप था कि राजस्व वसूली की प्रक्रिया में जमीनी स्तर पर पारदर्शिता नहीं है और जितनी वसूली होती है, उसका बड़ा हिस्सा अधिकारियों‑कर्मचारियों की जेब में चला जाता है.

पार्षद निधि के मुद्दे पर तकरार

बैठक में 25 लाख रुपये की पार्षद निधि से जुड़ी लंबित फाइलों का मुद्दा भी जोर‑शोर से उठा. पार्षद अर्चना गुप्ता और अभिषेक तिवारी ने नगर निगम कमिश्नर शेर सिंह मीना से जवाब मांगा. इस दौरान महापौर ने भी कमिश्नर को घेरते हुए लंबित फाइलें सदन में बुलाने और उन्हें जल्द निपटाने को कहा.

कमिश्नर के बयान से बिगड़ा माहौल

कमिश्नर ने जवाब में सभी वार्डों में करोड़ों रुपये के विकास कार्य होने की बात कही और पार्षद निधि के मुद्दे से बचने की कोशिश की. इस पर पार्षद अभिषेक तिवारी ने निधि के औचित्य पर ही सवाल उठा दिए. बहस के दौरान कमिश्नर का यह कहना कि “मैं आपके मुंह नहीं लगना चाहता”, माहौल को और गर्मा गया.

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तू‑तू, मैं‑मैं के बीच स्पीकर ने छोड़ा सदन

बजट पर चर्चा के दौरान सीवर लाइन, दूषित पेयजल, स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दों पर विपक्ष के पार्षद अमित अवस्थी की टोका‑टाकी से बहस तेज हो गई. सत्ता पक्ष के वरिष्ठ पार्षद गोपी गेलानी और विपक्षी पार्षदों के साथ‑साथ मनीष टेकवानी के बीच तीखी नोकझोंक हो गई. हालात इतने बिगड़ गए कि स्पीकर राजेश चतुर्वेदी को सदन छोड़कर जाना पड़ा.