गांव से जेल तक... सागर का सीरियल किलर ‘हल्कू’ से आज भी गांव वाले खाते हैं खौफ, जानिए दहशत की कहानी

Sagar Serial Killer Shiv Prasad Dhurve: सीरियल किलर शिवप्रसाद धुर्वे ने सागर में रात में घूम-घूमकर तीन चौकीदारों की सोते समय हत्याएं की थी. वहीं एक चौकीदार पर जान लेने की नियत से तवा मारकर घायल कर दिया था. इसके बाद वो भागकर राजधानी भोपाल पहुंचा था, जहां भी उसने एक मार्बल फैक्टरी में चौकीदार की हत्या कर दी थी.

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Sagar Serial Killer Halku : सागर जिले में चौकीदारों की नृशंस हत्याओं से सनसनी फैलाने वाला सीरियल किलर शिव प्रसाद धुर्वे उर्फ हल्कू एक बार फिर चर्चाओं में है. केसली विकासखंड के कैंकरा गांव से साइकिल से सागर पहुंचकर एक के बाद एक तीन हत्याएं करने वाले इस हत्यारे ने पूरे जिले को दहला दिया था. बेहद निर्दयी स्वभाव का यह अपराधी छह हत्याएं करने के बाद भी किसी तरह का पछतावा नहीं दिखा रहा था. गिरफ्तारी के बाद पुलिस वन में मीडिया के सामने विक्ट्री का साइन दिखाता हुआ उसका वीडियो भी सामने आया था.

शिव प्रसाद धुर्वे को उम्रकैद की सजा

इस मामले में कोर्ट ने शिव प्रसाद धुर्वे को उम्रकैद की सजा सुनाई है. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अबोध बालक और सोता हुआ व्यक्ति एक समान होते हैं, क्योंकि दोनों के पास बचाव की कोई उम्मीद नहीं होती. ऐसे अपराधों में कठोर सजा समाज के लिए एक मजबूत संदेश है.

आज भी गांव में दहशत

एनडीटीवी की टीम सागर जिले के केसली विकासखंड स्थित कैंकरा गांव पहुंची, जहां शिव प्रसाद का जन्म हुआ था. गांव में आज भी उसका नाम सुनकर लोग सहम जाते हैं. स्थिति यह है कि अधिकांश ग्रामीण उसके बारे में कुछ भी बोलने से कतराते हैं.

पिता बोले—गलती की, पर पेरोल मिलनी चाहिए

एनडीटीवी से बातचीत में शिव प्रसाद के पिता नन्हेवीर ने बताया कि उनके बेटे की मां का निधन हो चुका . उनका कहना है कि बेटे ने गंभीर गलती की है, लेकिन उसे पेरोल मिलनी चाहिए ताकि वह परिवार से मिल सके. उन्होंने बताया कि मामले के सामने आते ही समाज ने उनका बहिष्कार कर दिया था, फिर भी वो बेटे से मिलने जेल जाते रहते हैं. 

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बचपन से ही गुस्सैल प्रवृत्ति

शिव प्रसाद के शिक्षक संजय जैन ने बताया कि वह गांव के स्कूल में पांचवीं कक्षा तक पढ़ा था. बचपन से ही उसमें जिद और गुस्से की प्रवृत्ति थी, जो समय के साथ और उग्र होती चली गई.

जेल में सामान्य कैदी की तरह जीवन

केंद्रीय जेल अधीक्षक मानवेंद्र सिंह ने बताया कि शुरुआत में शिव प्रसाद को अलग बैरेक में रखा गया था, लेकिन बाद में उसने खुद को सुधरा हुआ बताते हुए अन्य कैदियों के साथ रहने की इच्छा जताई. इसके बाद उसे सामान्य कैदियों के साथ रखा गया. जेल में वो चौकीदारी का काम करता है और उसकी मुलाकात के लिए उसकी बहन और पिता आते हैं. जेल प्रशासन के अनुसार वह चाणक्य, महात्मा गांधी और धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन भी करता है.

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मनोवैज्ञानिक की चेतावनी

बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. छवि अग्रवाल के अनुसार ऐसे अपराधी बेहद खतरनाक और चालाक होते हैं. उन्होंने बताया कि इनमें कुछ हार्मोन अत्यधिक सक्रिय हो जाते हैं, जिससे इन्हें सामने वाले को जितना अधिक दर्द देने में उतनी ही खुशी मिलती है. कई मामलों में दूसरों को पीड़ा देने से इन्हें यौन संतुष्टि भी मिलती है.

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