बचपन से बागवानी का था शौक, डॉ. प्रेरणा ने छत को बना दिया मिनी गार्डन, गर्मी में 10° कम रहता है यहां का तापमान

Rooftop Gardening: सागर की वेटनरी डॉ. प्रेरणा ने घर की छत पर ही मिनी गार्डन बना दिया. इससे तपती गर्मी में भी घर के अंदर ठंडक बनी रहती है और बिजली की खपत भी कम होती है. गर्मी के दिनों में यहां 10 डिग्री सेल्सियस तक कम तापमान दर्ज किया जाता है. इतना ही नहीं इस हरियाली को देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है और यहां लोगों को काफी सुकून मिलता है.

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Sagar Rooftop Gardening: पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने की मिसाल पेश करते हुए बीना तहसील में पदस्थ वेटनरी डॉक्टर डॉ. प्रेरणा ठाकुर ने अपने घर की छत को एक खूबसूरत मिनी गार्डन में बदल दिया है. उनकी इस अनोखी पहल की चर्चा इन दिनों पूरे जिले में हो रही है. करीब 100 वर्ग मीटर क्षेत्र में फैले इस गा र्डन में 150 से अधिक पौधे लगाए गए हैं, जिनमें फूलदार, छायादार और औषधीय पौधों की विविध प्रजातियां शामिल हैं.

डॉ. प्रेरणा का कहना है कि उन्हें बचपन से ही बागवानी का शौक रहा है. इस रुचि के पीछे उनके नाना स्वर्गीय एन.के. राय का बड़ा योगदान रहा, जो रेलवे में अधिकारी थे. व्यस्त दिनचर्या के बावजूद वे पेड़-पौधों के लिए समय निकालते थे. प्रेरणा बचपन से ही उन्हें देखती थीं और बागवानी में उनका हाथ भी बंटाती थीं. यही लगाव समय के साथ उनका जुनून बन गया.

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खाली पड़ी जगह को बनाया हरा-भरा

कॉलेज के दिनों में भी वे पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संगोष्ठियों में सक्रिय रूप से भाग लेती थीं और अपने विचार रखती थीं. उनकी पहली पोस्टिंग उज्जैन में हुई, जहां उन्होंने किराए के घर के बाहर खाली पड़ी जगह को हरा-भरा कर दिया. इसके बाद जब उनका ट्रांसफर सागर हुआ, तो उन्होंने अपने घर की खाली छत को उपयोग में लाते हुए इसे एक सुंदर गार्डन में परिवर्तित कर दिया.

लोगों को उपहार में देती हैं पौधे

डॉ. प्रेरणा बताती हैं कि वे जहां भी जाती हैं, वहां से एक पौधा जरूर लेकर आती हैं. इतना ही नहीं, वे शादी या किसी भी खुशी के मौके पर लोगों को पौधे उपहार में देती हैं, ताकि हरियाली का संदेश फैल सके. अब वे एक पौधे से कई पौधे तैयार करने की तकनीक में भी दक्ष हो चुकी हैं. उनके इस मिनी गार्डन की खास बात यह है कि यह न सिर्फ देखने में सुंदर है, बल्कि घर के तापमान को भी नियंत्रित करता है. गर्मियों के दौरान यह गार्डन छत के तापमान को लगभग 10 डिग्री सेल्सियस तक कम कर देता है, जिससे घर के अंदर ठंडक बनी रहती है और बिजली की खपत भी कम होती है.

गार्डनिंग के लिए बिजी शेड्यूल से निकालती है 3-4 घंटे

कोरोना महामारी के दौरान डॉ. प्रेरणा ने अपने गार्डन में लगे औषधीय पौधों का उपयोग लोगों के उपचार में भी किया. उन्होंने कई लोगों को घरेलू नुस्खों के जरिए राहत पहुंचाई. उनका मानना है कि प्रकृति में हर बीमारी का इलाज छिपा होता है, बस उसे समझने की जरूरत है. डॉ. प्रेरणा अपने व्यस्त शेड्यूल के बावजूद रोजाना 3 से 4 घंटे गार्डनिंग के लिए निकालती हैं. वे ड्यूटी पर जाने से पहले और लौटने के बाद पौधों की देखभाल करती हैं. उनके गार्डन में गुड़हल, गुलाब, अपराजिता, कुमुदिनी, अग्नि लता, बोगनवेलिया, कृष्ण कमल, पारिजात, चमेली, मोगरा, चंपा, चांदनी, गेंदा, मरु गुलाब और पेंटास जैसे कई आकर्षक फूलों के पौधे लगे हुए हैं.

हरियाली देख हर कोई हो जाता मंत्रमुग्ध

उनके घर आने वाला हर व्यक्ति इस हरियाली को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता है और मन को एक अलग ही शांति का अनुभव करता है. डॉ. प्रेरणा ठाकुर की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि अगर इच्छाशक्ति हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है.

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