हाथ में चप्पल, कंधों पर बैग: जान जोखिम में डालकर स्कूल जाते हैं सिंगरौली में ये बच्चे

यहां सिर्फ प्राथमिक स्कूल है, माध्यमिक या हाई स्कूल के बच्चे बगल की पंचायत में बने स्कूल में पढ़ने जाते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें संकरी नदी को रोजाना पार करना पड़ता है. तस्वीरें जिले के हर्रैया गांव की है. बताइए इन मासूम बच्चों को अपने भविष्य के सपने को साकार करने के लिए कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

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इन बच्चों के कंधे पर बैग तो होता ही है लेकिन इनके हाथों में चप्पलें और इनके कपड़े होते हैं. ये बच्चे पढ़ने के लिए रोजाना इसी तरह से स्कूल जाते हैं. इनके वापस आने तक अभिभावकों को डर भी लगा रहता है.
सिंगरौली:

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के हर्रैया गांव में बच्चों को स्कूल जाने के लिए अपनी जान को खतरे में डालना पड़ रहा है, क्योंकि आजादी के 75 साल बाद भी यहां एक अदद पुल भी नहीं बन सका है. जिसकी वजह से इन बच्चों के कंधे पर बैग तो होता ही है लेकिन इनके हाथों में चप्पलें और इनके कपड़े भी होते हैं. बच्चे पढ़ने के लिए रोजाना इसी तरह से स्कूल जाते हैं. इनके वापस आने तक इनके अभिभावकों को डर लगा रहता है.  उन्हें हर सुबह बच्चों के स्कूल जाने के बाद इनकी सलामती की दुआ करनी पड़ती है.

रोज करनी पड़ती है नदीं पार

ऐसा नहीं कि इन बच्चों के पंचायत में स्कूल नहीं है, लेकिन जो स्कूल है वो सिर्फ प्राथमिक स्कूल है, माध्यमिक या हाई स्कूल के बच्चे बगल की पंचायत में बने स्कूल में पढ़ने जाते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें छोटी सी नदी को रोजाना पार करना पड़ता है.  

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इनकी कब सुनेगी सरकार, जनप्रतिनिधि?

इस मामले पर हर्रैया गाँव के सरकारी स्कूल की हेडमास्टर विजय लक्ष्मी सिंह ने कहा कि रोजाना बच्चे नदी पार कर स्कूल आते जाते हैं, इस मामले को लेकर कलेक्टर से लेकर जनप्रतिनिधियों तक इसकी जानकारी दी गई है, लेकिन आज तक इस मामले में ना तो यहाँ के जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहें है और ना ही जिला प्रशासन.

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