Bhind News: भिंड जिले में किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग का एक प्रशासनिक फैसला विवादों में घिर गया है. जिस अधिकारी के खिलाफ लाखों रुपये की वित्तीय अनियमितता और गबन के आरोपों की जांच के बाद एफआईआर दर्ज कराने की अनुशंसा की गई थी, उसी अधिकारी रामसुजान शर्मा को दोबारा भिंड जिले का प्रभारी उपसंचालक नियुक्त किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं. विभागीय जांच में उनके खिलाफ 10 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता का उल्लेख किया गया था. हालांकि मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है. इस नियुक्ति के बाद विभाग की पारदर्शिता, जवाबदेही और जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
भिंड में प्रभारी उपसंचालक बनाए गए रामसुजान शर्मा
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग द्वारा रीवा से स्थानांतरित कर रामसुजान शर्मा को भिंड जिले में प्रभारी उपसंचालक की जिम्मेदारी सौंपी गई है. हालांकि उन्होंने अभी तक पदभार ग्रहण नहीं किया है, लेकिन उनकी नियुक्ति ने विभाग के भीतर और बाहर चर्चा का माहौल बना दिया है. विवाद की वजह यह है कि रामसुजान शर्मा का नाम पहले से ही भिंड जिले में सामने आए एक कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में जांच रिपोर्ट में दर्ज है. ऐसे में उन्हें पुनः उसी जिले में जिम्मेदारी सौंपे जाने के फैसले पर सवाल उठ रहे हैं.
Bhind News: FIR दर्ज कराने की अनुशंसा वाला पत्र
एरियर भुगतान मामले में सामने आया था नाम
जानकारी के अनुसार वर्ष 2022-23 में कृषि विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारियों के एरियर भुगतान से जुड़े मामले में वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत सामने आई थी. इसके बाद विभागीय स्तर पर जांच कराई गई थी. जांच में सहायक भूमि संरक्षण कार्यालय से जुड़े तीन अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की गई. जांच रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन अधिकारी वीरेंद्र तोमर पर लगभग 43 लाख रुपये, जयसिंह पर करीब 6 लाख रुपये तथा रामसुजान शर्मा पर 10 लाख 42 हजार 783 रुपये की वित्तीय अनियमितता अथवा गबन का आरोप पाया गया था.
जांच समिति ने एफआईआर की दी थी अनुशंसा
मामले की जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा कुल 14 लाख 63 हजार रुपये की राशि जमा कराए जाने की जानकारी भी सामने आई थी. इसके बावजूद जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनियमितताओं को गंभीर माना. बताया गया कि पांच सदस्यीय जांच समिति ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 के तहत संबंधित थाने में आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की अनुशंसा की थी. समिति ने अपनी रिपोर्ट विभाग को सौंपते हुए दोषी पाए गए अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी.
विभाग ने भी दिए थे एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश
सूत्रों के अनुसार जांच प्रतिवेदन के आधार पर किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, भोपाल ने भी संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए थे. इसके बाद माना जा रहा था कि मामले में आगे कानूनी कार्रवाई तेज होगी. हालांकि इसी बीच रामसुजान शर्मा को भिंड जिले में प्रभारी उपसंचालक के पद पर पदस्थ किए जाने के आदेश सामने आने के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं. जैसे कि जिस जिले में कथित अनियमितता हुई और जहां जांच हुई, वहीं आरोपी अधिकारी की नियुक्ति उचित नहीं मानी जा सकती.
जांच प्रभावित होने की आशंका
विभागीय सूत्रों और जानकारों का मानना है कि किसी वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामले में जांच के दायरे में रहे अधिकारी को उसी जिले में महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद देना जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकता है. उनका तर्क है कि ऐसी स्थिति में रिकॉर्ड, गवाहों अथवा विभागीय प्रक्रियाओं पर प्रभाव पड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता. हालांकि इस संबंध में किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा ऐसी कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है.
Bhind News: नियुक्ति आदेश
नियुक्ति पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि विभाग स्वयं जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दे चुका था, तो फिर उसी अधिकारी को जिले की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया. यह मामला केवल एक प्रशासनिक नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों में जवाबदेही, पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया की विश्वसनीयता जैसे मुद्दों को भी केंद्र में लेकर आया है.
रामसुजान शर्मा ने क्या कहा?
इस पूरे मामले पर रामसुजान शर्मा का कहना है कि कथित गबन से जुड़ा मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है. उनका कहना है कि मामला न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत है और वही अंतिम रूप से तथ्यों का निर्धारण करेगी.
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