Ram Navami 2026 Ban Darshan Neemuch: मध्य प्रदेश में नीमच (Neemuch) जिले के रामपुरा तहसील स्थित हतुनिया गांव (Hatuniya Village) एक बार फिर आस्था, परंपरा और रहस्य के अद्भुत संगम का साक्षी बनने जा रहा है. यहां स्थित श्री राम लक्ष्मण दरबार मंदिर (Lakshman Temple) में करीब 300 साल पुरानी ‘बाण दर्शन' परंपरा का आयोजन 27 मार्च 2026 को किया जाएगा. खास बात यह है कि यह आयोजन पूरे 20 साल बाद हो रहा है, जिससे गांव और आसपास के क्षेत्रों में विशेष उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है.
Ram Navami 2026: बाण दर्शन नीमच
दुर्लभ संयोग में होता है आयोजन
ग्रामीणों के अनुसार, ‘बाण दर्शन' की यह परंपरा हर वर्ष नहीं होती. यह आयोजन तभी संभव होता है, जब चैत्र नवरात्र की रामनवमी शुक्रवार को पड़ती है. इस वर्ष ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसके कारण श्रद्धालुओं में खास उत्सुकता है.
Ram Navami 2026: मंदिर के पुजारी
300 साल पुरानी परंपरा और इसका इतिहास
मान्यता है कि इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1753 में श्री राम लक्ष्मण दरबार मंदिर की प्राण‑प्रतिष्ठा के साथ हुई थी. तब राजस्थान के किशनगढ़ से भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता जानकी और गरुड़ की मूर्तियां यहां लाई गई थीं, जिन्हें नागा साधुओं द्वारा बनवाया गया था. कथा के अनुसार, साधु समय पर मूर्तियां लेने नहीं पहुंचे, बाद में लौटने पर वे श्रीराम और माता जानकी की मूर्तियां तो ले गए, लेकिन लक्ष्मण जी की मूर्ति को नहीं उठा सके. इसे दिव्य संकेत मानते हुए मूर्ति यहीं स्थापित कर दी गई और तभी से ‘बाण दर्शन' की परंपरा शुरू हुई.
ऐसे होता है ‘बाण दर्शन'
रामनवमी के दिन सुबह से मंदिर में विशेष पूजा, वेद पाठ, यज्ञ और अभिषेक होते हैं. प्रातः आरती के बाद करीब 300 वर्ष पुराना बाण मंदिर से बाहर लाकर ज्वार के ढेर में खड़ा किया जाता है. चयनित मामा‑भांजे की जोड़ी को निर्धारित दूरी पर खड़ा कर, बाण के बीच से निकली डोरियों को उनके गले में डाला जाता है. हवन और जयघोष के दौरान डोरियां धीरे‑धीरे अपने आप ऊपर उठकर बाण से जा लगती हैं. इस दौरान लक्ष्मण जी की प्रतिमा पर पसीने की बूंदें दिखाई देती हैं, जिसे ग्रामीण दिव्य संकेत मानते हैं.
Ram Navami 2026: मंदिर के पुजारी बाण के बारे में बताते हुए
अनुमति और संयम की परंपरा
बाण चढ़ाने से पहले भगवान लक्ष्मण से विधिवत अनुमति ली जाती है. आयोजन से 24 घंटे पहले पूरे गांव में उपवास और संयम का पालन किया जाता है. किसी घर में चूल्हा नहीं जलता और पूरा गांव श्रद्धा में लीन रहता है.
अगली बार 42 साल बाद दिखेगा यह दृश्य
ग्रामीणों के मुताबिक, 1753 के बाद 1971, 1977, 1983 और 2006 में आयोजन हुआ था. अब 27 मार्च 2026 को 20 साल बाद यह परंपरा निभाई जाएगी. अगला ऐसा संयोग वर्ष 2068 में बनेगा.
भव्य तैयारियों से सजा गांव
आयोजन समिति अध्यक्ष देवी लाल गुर्जर के अनुसार, इस बार करीब 50 हजार श्रद्धालुओं के आने की संभावना है. सुरक्षा और व्यवस्थाओं को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए हैं. गांव को दुल्हन की तरह सजाया गया है, वहीं आयोजन के समापन पर महाप्रसादी का भी आयोजन होगा.
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