यादों में सिमटा संवाद का सबसे भरोसेमंद माध्यम 'डाक पत्र बॉक्स', पुराने दिन याद कर भावुक हुए लोग, की खास अपील

Postal Letter Box: छतरपुर के सर्किट हाउस पर लगा डाक पत्र बॉक्स आज भी मौजूद है नए रंग-रोगन के साथ... लेकिन उसमें न खत गिरते हैं, न डाकिया ताला खोलता है... लोग रुकते हैं, देखते हैं और सेल्फी लेकर बीते दौर को याद कर आगे बढ़ जाते हैं.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins

Postal Letter Box: कभी खत बोलते थे और डाक पेटी सुनती थी... कभी दिल की बात कहने के लिए मोबाइल नहीं, खत लिखा जाता था और उस खत का भरोसा होता था- 'डाक पत्र बॉक्स'... सन 1989 की सुपरहिट फिल्म 'मैंने प्यार किया' में भाग्यश्री द्वारा सलमान खान को भेजा गया प्रेम पत्र हो या गांव-शहरों में सुबह-शाम ताला खुलने की आवाज... डाक पेटी कभी सिर्फ लोहे का बॉक्स नहीं थी, वो भावनाओं की तिजोरी हुआ करती थी.

संवाद का सबसे भरोसेमंद माध्यम था 'डाक पत्र बॉक्स'

भारत में 1766 से शुरू हुई डाक सेवा ने पीढ़ियों को जोड़ा. मोबाइल और इंटरनेट से पहले शहरी और ग्रामीण अंचलों में लगे डाक पत्र बॉक्स संवाद का सबसे भरोसेमंद माध्यम थे. डाकिया सुबह-शाम आता, ताला खोलता और खत अपने सफर पर निकल पड़ते. लेकिन समय बदला… आज वही डाक पत्र बॉक्स यादों में सिमट कर रह गए हैं.

Advertisement

अब यादों में सिमट कर रह गया

छतरपुर के सर्किट हाउस पर लगा डाक पत्र बॉक्स आज भी मौजूद है नए रंग-रोगन के साथ, लेकिन उसमें न खत गिरते हैं, न डाकिया ताला खोलता है... लोग रुकते हैं, देखते हैं और सेल्फी लेकर बीते दौर को याद कर आगे बढ़ जाते हैं.

स्थानीय लोग की ये मांग

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह सेवा दोबारा सक्रिय हो जाए, तो गोपनीय सूचनाएं सुरक्षित रूप से प्रशासन तक पहुंच सकती हैं. डाक विभाग में भीड़ कम हो सकती है और संवाद का एक भरोसेमंद माध्यम फिर जीवित हो सकता है.

असिस्टेंट पोस्ट मास्टर सत्यदेव चतुर्वेदी का कहना है कि विभाग द्वारा प्रयास किए जाएंगे कि डाक पत्र बॉक्स नियमित रूप से खोले जाएं और खराब बॉक्स को बदलकर फिर से उपयोग में लाया जाए.

ये भी पढ़ें: जिये तो जिये कैसे..?' जिंदा नहीं रहना चाहता कुमार सानू का ये फैन, एक-दो नहीं कई बार उठाया खौफनाक कदम

Advertisement

ये भी पढ़ें: Makar Sankranti Special: 'कच्चा बादाम' के बाद, वायरल हुआ 'लड्डू वाला', सुमधुर गीत सुन थम जाती है भीड़

Topics mentioned in this article