प्याज के दामों में पिछले एक महीने के दौरान उल्लेखनीय उछाल देखने को मिला है. थोक मंडी में जहां एक माह पहले औसत गुणवत्ता का प्याज महज 2 से 4 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा था, वहीं अब इसके दाम 7 से 8 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं. अच्छी गुणवत्ता वाला प्याज, जो पहले 8 से 10 रुपये किलो बिक रहा था, अब 15 से 17 रुपये प्रति किलो के भाव बिक रहा है. बावजूद इसके प्याज उत्पादक किसानों के चेहरों पर खुशी नहीं, बल्कि मायूसी दिखाई दे रही है.
दरअसल, भाव बढ़ने से पहले ही अधिकांश किसानों ने अपनी फसल बेच दी थी. छोटे और सीमांत किसानों ने तो अपनी पूरी उपज पहले ही बाजार में निकाल दी, जबकि बड़े किसानों के पास भी अब सीमित मात्रा में ही स्टॉक बचा है. ऐसे में वर्तमान तेजी का लाभ किसानों के बजाय व्यापारियों और स्टॉकिस्टों को मिलने की संभावना अधिक दिखाई दे रही है.
मानसून की तैयारी ने बढ़ाई किसानों की मजबूरी
प्याज बेचने के लिए मंडी पहुंचे किसान गोकुल सिंह का कहना है कि प्याज की फसल तैयार होने के बाद उन्हें सोयाबीन सीजन की तैयारियों के लिए तत्काल नकदी की आवश्यकता होती है. बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और खेत की जुताई जैसे खर्च नगद भुगतान से ही पूरे होते हैं. यही कारण रहा कि किसानों ने कम कीमतों पर भी मजबूरी में प्याज बेच दिया.
किसान प्रधान सिंह के अनुसार, यदि उन्हें फसल भंडारण और सस्ती वित्तीय सहायता की बेहतर व्यवस्था मिलती तो वे फसल को रोककर बेहतर भाव मिलने का इंतजार कर सकते थे. लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की वास्तविकता यह है कि अधिकांश किसानों को नई फसल की तैयारी के लिए पुरानी फसल तुरंत बेचनी पड़ती है.
बेमौसम बारिश ने बिगाड़ी फसल की गुणवत्ता
प्रधान सिंह ने आगे बताया कि इस वर्ष प्याज उत्पादकों को मौसम की मार भी झेलनी पड़ी. किसानों के अनुसार फसल के महत्वपूर्ण चरण में हुई बेमौसम बारिश और नमी के कारण प्याज में रोग लग गया. इससे उत्पादन में कमी आई और गुणवत्ता भी प्रभावित हुई.
परिणामस्वरूप बाजार में टिकाऊ और उच्च गुणवत्ता वाले प्याज की भारी कमी पैदा हो गई है. मंडी में आने वाला अधिकांश माल मध्यम या सामान्य गुणवत्ता का है, जिसकी भंडारण क्षमता सीमित है. व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में उपलब्ध अधिकांश प्याज दो से तीन महीने से अधिक सुरक्षित नहीं रह पाएगा.
थोक बाजार में अच्छे माल की किल्लत
आगर-मालवा की मंडी में इन दिनों सबसे बड़ी समस्या अच्छे गुणवत्ता वाले प्याज की उपलब्धता है. राजस्थान ने सीकर से खरीदी के लिए आए स्टॉकिस्ट श्रीराम ने एनडीटीवी को बताया कि पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 30 प्रतिशत कम माल भंडारित हुआ है. जिन किसानों के पास उच्च गुणवत्ता वाला प्याज था, उनकी उपज भी उत्पादन में कमी के कारण सीमित रही. यही कारण है कि बड़े व्यापारियों और स्टॉकिस्टों के गोदाम अपेक्षाकृत खाली दिखाई दे रहे हैं. बाजार में मांग तो है, लेकिन लंबे समय तक सुरक्षित रखे जा सकने वाले माल की कमी ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है.
श्रीराम का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में आपूर्ति में उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ तो अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज के दामों में और तेजी देखने को मिल सकती है.
महाराष्ट्र और राजस्थान के खरीदारों की बढ़ी रुचि
सालों से प्याज का ठीक व्यापार करने वाले व्यापारी मुकेश माली ने कहा कि आगर-मालवा मंडी में इस समय स्थानीय व्यापारियों के अलावा महाराष्ट्र और राजस्थान से भी खरीदार पहुंच रहे हैं. अच्छे माल की तलाश में बाहरी राज्यों के स्टॉकिस्ट लगातार मंडी का रुख कर रहे हैं.
मंडी से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि क्षेत्र में उपलब्ध बेहतर गुणवत्ता वाले प्याज की मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि आपूर्ति सीमित है. इसी कारण प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कीमतों को और समर्थन मिल रहा है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी दिख रहा असर
स्टॉकिस्ट श्रीराम कहते है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय प्याज की मांग मजबूत बनी हुई है. विशेष रूप से बांग्लादेश और खाड़ी देशों, खासकर दुबई के बाजारों में भारतीय प्याज की अच्छी मांग है. हालांकि वर्तमान में निर्यात और सीमा संबंधी व्यवस्थाओं के कारण व्यापार पूरी क्षमता से नहीं हो पा रहा है. यदि निर्यात संबंधी प्रतिबंधों में और ढील मिलती है अथवा सीमा पार व्यापार पूरी तरह सामान्य होता है तो घरेलू बाजार में उपलब्ध स्टॉक पर अतिरिक्त दबाव बनेगा और कीमतों में तेजी और बढ़ सकती है.
मंडी के जानकारों का अनुमान है कि आपूर्ति की मौजूदा स्थिति बनी रही और निर्यात मांग सक्रिय हुई तो आने वाले महीनों में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज के दाम 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकते हैं.
उपभोक्ताओं की बढ़ी चिंता
प्याज के बढ़ते दामों का सीधा असर आम उपभोक्ता की रसोई पर दिखाई देने लगा है. खुदरा बाजार में औसत गुणवत्ता वाला प्याज 12 से 15 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि बेहतर गुणवत्ता वाले प्याज के दाम इससे भी अधिक हैं. व्यापारियों का मानना है कि यदि अगले कुछ महीनों में बाजार में नई आपूर्ति नहीं बढ़ी तो खुदरा कीमतों में और वृद्धि हो सकती है. ऐसे में प्याज एक बार फिर आम उपभोक्ता के बजट पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है.
आगर-मालवा की प्याज मंडी इस समय एक विरोधाभासी स्थिति का सामना कर रही है. दाम बढ़ रहे हैं, लेकिन किसान लाभ नहीं उठा पा रहे. बाजार में मांग मजबूत है, लेकिन टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण माल की कमी बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय मांग और सीमित स्टॉक के कारण व्यापारियों को आगे और तेजी की उम्मीद है. दूसरी ओर किसानों का कहना है कि यदि उन्हें भंडारण और वित्तीय सहायता की बेहतर सुविधाएं मिलें तो वे भी बाजार की इस तेजी का वास्तविक लाभ प्राप्त कर सकते हैं. फिलहाल प्याज के बढ़ते दामों का सबसे अधिक असर उपभोक्ताओं की थाली पर दिखाई दे रहा है, जबकि किसान एक बार फिर बेहतर भाव मिलने के बावजूद उससे वंचित रह गया है.