Nursing Recruitment 2026:  मध्य प्रदेश में स्टाफ नर्स भर्ती को लेकर विवाद, हजारों पद खाली फिर भी केवल 7 पदों पर भर्ती का आरोप

Nursing Recruitment News: अस्पतालों में स्टाफ नर्स की भारी कमी के कारण मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं. ऐसे समय में सरकार द्वारा घोषित इस तथाकथित “बंपर भर्ती” में पूरे प्रदेश के लिए केवल 7 पदों का विज्ञापन जारी किया गया है, जबकि वास्तविकता में हजारों पद रिक्त बताए जा रहे हैं.

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Nursing Recruitment in Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में स्टाफ नर्स भर्ती को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. आरोप लगाया जा रहा है कि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में हजारों पद लंबे समय से खाली पड़े हैं, लेकिन हाल ही में जारी भर्ती विज्ञापन में मात्र सात पदों पर ही नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की गई है. इस मुद्दे को लेकर एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं और इसे नर्सिंग अभ्यर्थियों के साथ अन्याय बताया है.

रवि परमार ने भोपाल में बयान जारी कर कहा कि नर्सिंग घोटाले के बाद पहले से ही प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था दबाव में है. अस्पतालों में स्टाफ नर्स की भारी कमी के कारण मरीजों को पर्याप्त स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं. ऐसे समय में सरकार द्वारा घोषित इस तथाकथित “बंपर भर्ती” में पूरे प्रदेश के लिए केवल 7 पदों का विज्ञापन जारी किया गया है, जबकि वास्तविकता में हजारों पद रिक्त बताए जा रहे हैं.

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मध्य प्रदेश में स्टाफ नर्स भर्ती को लेकर विवाद, हजारों पद खाली फिर भी केवल 7 पदों पर भर्ती का आरोप
Photo Credit: AI Generated Image

 आरक्षित वर्ग के लिए पद नहीं होने पर आपत्ति

रवि परमार ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इस भर्ती में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए एक भी पद निर्धारित नहीं किया गया है. उन्होंने इसे सामाजिक न्याय और संविधान में दिए गए आरक्षण प्रावधानों की भावना के विपरीत बताते हुए कहा कि इससे यह संकेत मिलता है कि आरक्षित वर्ग के योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों की अनदेखी की जा रही है.

 युवाओं के साथ अन्याय का आरोप

एनएसयूआई के भोपाल जिला अध्यक्ष अक्षय तोमर ने भी इस मुद्दे पर सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि इतनी सीमित भर्ती और आरक्षण शून्य रखने का फैसला युवाओं के साथ अन्याय है. उनके मुताबिक यह निर्णय न केवल बेरोजगार नर्सिंग अभ्यर्थियों को निराश करने वाला है, बल्कि प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को भी कमजोर कर सकता है.

 एनएसयूआई की प्रमुख मांगें

इस पूरे मामले को लेकर एनएसयूआई ने सरकार से कई मांगें रखी हैं. संगठन ने कहा है कि—

1. प्रदेश में रिक्त सभी स्टाफ नर्स पदों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक की जाए.
2. पारदर्शी प्रक्रिया के तहत हजारों पदों पर नियमित भर्ती निकाली जाए.
3. संविधान के अनुरूप आरक्षण व्यवस्था का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए.

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रवि परमार ने मध्यप्रदेश के सभी पंजीकृत नर्सिंग अभ्यर्थियों से अपील करते हुए कहा है कि जब तक सरकार पदों की संख्या और आरक्षण व्यवस्था को स्पष्ट और न्यायसंगत रूप में लागू नहीं करती, तब तक इस भर्ती प्रक्रिया का शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से बहिष्कार किया जाए. उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि सरकार जल्द इस फैसले में संशोधन नहीं करती है तो इस मुद्दे को लेकर व्यापक जन आंदोलन किया जाएगा. रवि परमार का कहना है कि युवाओं के भविष्य और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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