‘आमों की मलिका’ नूरजहां का जलवा; 3.30 किलो का आम ₹3,800 में बिका, 4 किलो तक पहुंचने की उम्मीद

मध्यप्रदेश के आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में ‘नूरजहां’ आम ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं. देश के कई राज्यों के साथ विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ रही है. अपनी दुर्लभता और जैविक खेती के कारण यह आम किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रहा है.

विज्ञापन
Read Time: 4 mins
आमों की मलिका’ नूरजहां का जलवा, भारी वजन और ऊंची कीमत

Noorjahan Mango Alirajpur: मध्यप्रदेश के आलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में इन दिनों ‘आमों की मलिका' कही जाने वाली नूरजहां किस्म चर्चा का केंद्र बनी हुई है. अपने असाधारण आकार और ऊंची कीमत के लिए प्रसिद्ध इस दुर्लभ आम की इस सीजन में रिकॉर्ड तोड़ मांग देखने को मिल रही है. स्थानीय उत्पादकों के मुताबिक इस बार 3.30 किलोग्राम वजन का एक नूरजहां आम 3,800 रुपये में बिका है, जबकि कुछ फलों का वजन 4 किलोग्राम तक पहुंचने की संभावना है. देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक इसकी मांग बढ़ने से यह खास किस्म फिर सुर्खियों में आ गई है.

कट्ठीवाड़ा : नूरजहां आम का प्रमुख केंद्र

इंदौर से करीब 250 किलोमीटर दूर स्थित कट्ठीवाड़ा क्षेत्र नूरजहां आम की खेती के लिए खास पहचान बना चुका है. यहां के किसान इस दुर्लभ किस्म की खेती वर्षों से कर रहे हैं, जो आकार और स्वाद दोनों के लिए जानी जाती है. उत्पादकों का कहना है कि इस साल मौसम अनुकूल रहने से फसल संतोषजनक रही है.

Advertisement

रिकॉर्ड वजन और ऊंची कीमत

स्थानीय किसान भरतराज सिंह जादव ने बताया कि उनके बाग में इस सीजन का सबसे बड़ा नूरजहां आम 3.30 किलोग्राम वजन का रहा, जिसे उन्होंने 3,800 रुपये में बेचा. उन्होंने उम्मीद जताई कि जून के अंत तक कुछ आमों का वजन 4 किलोग्राम तक पहुंच सकता है, जो इसे और खास बना देगा.

Noorjahan Mango Alirajpur: स्थानीय किसान आम के साथ

देश-विदेश में बढ़ी मांग

नूरजहां आम की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. किसान बताते हैं कि इस आम की मांग मध्यप्रदेश के अलावा राजस्थान, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से भी आ रही है. इसके साथ ही, विदेशों में रहने वाले भारतीयों के माध्यम से संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और स्पेन तक भी यह आम पहुंच रहा है.

जैविक तरीके से होती है खेती

भरतराज सिंह जादव ने बताया कि उनके बाग में नूरजहां आम की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की जाती है. रासायनिक उर्वरकों की बजाय जंगल और प्राकृतिक स्रोतों से मिलने वाले जैविक पदार्थों का उपयोग किया जाता है, जिससे फल का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है.

सुरक्षा के लिए रखे जाते हैं गार्ड

नूरजहां आम की ऊंची कीमत के चलते इसकी सुरक्षा भी चुनौती बन जाती है. उत्पादक बताते हैं कि बागों में करीब 10 गार्ड तैनात किए जाते हैं, ताकि कोई नुकसान या चोरी न हो सके.

Advertisement

अन्य बागों में भी अच्छी फसल

कट्ठीवाड़ा के ही एक अन्य उत्पादक शिवराज जादव ने बताया कि उनके बाग में भी नूरजहां के छह पेड़ हैं. इनमें कई आमों का वजन करीब 3 किलोग्राम है, जबकि कुछ अभी पूरी तरह पकने बाकी हैं और उनका वजन और बढ़ सकता है.

जनवरी से शुरू होता है उत्पादन चक्र

किसानों के अनुसार नूरजहां आम के पेड़ों पर जनवरी से बौर आना शुरू होता है और जून तक फल तैयार हो जाते हैं. हालांकि पहले इस आम का वजन करीब 4.50 किलो तक पहुंच जाता था, लेकिन अब यह औसतन 3.50 से 3.80 किलो के बीच रहता है.

Advertisement

यह भी पढ़ें : राम मंदिर दान विवाद: मंदिर ट्रस्ट भंग करने और CBI जांच की मांग, पुजारी महासंघ ने PM मोदी को लिखा पत्र

यह भी पढ़ें : ट्रांसफर आज रात तक; इंदौर मेट्रो की लागत बढ़ी, स्वास्थ्य नीति 2026 को भी मंजूरी, मोहन कैबिनेट के बड़े फैसले

यह भी पढ़ें : राम मंदिर दान विवाद: मंदिर ट्रस्ट भंग करने और CBI जांच की मांग, पुजारी महासंघ ने PM मोदी को लिखा पत्र

यह भी पढ़ें : राम मंदिर दान विवाद: मंदिर ट्रस्ट भंग करने और CBI जांच की मांग, पुजारी महासंघ ने PM मोदी को लिखा पत्र