मध्य प्रदेश के निवाड़ी जिला प्रशासन ने कलेक्टर जमुना भिड़े के नेतृत्व में मातृ सुरक्षा अभियान शुरू किया है. यह सिर्फ स्वास्थ्य जांच नहीं बल्कि गर्भवती महिलाओं के लिए जीवनरक्षक मिशन बन चुका है. जिले में लगाए जा रहे शिविरों में गर्भवती महिलाओं की पहचान कर उनका परीक्षण किया जा रहा है, ताकि डिलेवरी के समय किसी भी जानलेवा स्थिति को पहले ही रोका जा सके.
पृथ्वीपुर में विशाल स्वास्थ्य शिविर
निवाड़ी के सफल आयोजन के बाद, आज पृथ्वीपुर में भी एक विशाल स्वास्थ्य शिविर लगाया गया. बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं अपने स्वास्थ्य की जांच कराने पहुंचीं. कलेक्टर जमुना भिड़े ने बताया कि यह शिविर स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और आयुष विभाग के संयुक्त प्रयास से आयोजित किया गया है.
जांच में चौंकाने वाले आंकड़े
स्वास्थ्य शिविर में कुल 350 महिलाओं का रजिस्ट्रेशन हुआ, जिनमें से 201 महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) पाई गई. यह आंकड़ा दिखाता है कि आधे से ज्यादा गर्भवती महिलाएं डिलेवरी के समय गंभीर खतरे में हैं.
जिन महिलाओं में खून की कमी मिली, उन्हें आयरन सप्लीमेंट, FCM और पोषण सलाह दी गई. इसके अलावा, उन्हें खान-पान में हरी सब्जियां, दाल, गुड़, चना और संतुलित आहार लेने की सलाह दी गई. साथ ही उनकी नियमित निगरानी की भी व्यवस्था की गई है.
ब्लॉक स्तर तक विस्तार
जिला प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि अभियान ब्लॉक स्तर तक पहुंचाया जाए. जनसंपर्क अभियान के तहत लगातार स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे. कलेक्टर ने साफ कहा कि डिलेवरी के समय जो गर्भवती कमजोर होती हैं या जिनका हीमोग्लोबिन कम हो जाता है, उनकी जान को खतरा होता है. इसे रोकने के लिए यह अभियान लगातार चलता रहेगा.
माताओं की जान सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता
जिला प्रशासन का लक्ष्य है कि कोई भी गर्भवती महिला बिना जांच के न रहे और हर डिलेवरी पूरी तरह सुरक्षित हो. यह अभियान केवल स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि समय पर इलाज और सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करने का एक निर्णायक कदम है.