Kanchanbai Death Case: कंचन बाई के परिजनों को न्याय दिलाने घंटों कलेक्ट्रेट में डटा रहा समाज, कलेक्टर नहीं पहुंचे तो जमकर की नारेबाजी

MP News: मधुमक्खियों के हमले से 20 बच्चों की जान बचाने वाली कंचन बाई के परिजनों को न्याय दिलाने के लिए घंटों कलेक्ट्रेट में समाज  डटा रहा. कलेक्टर नहीं पहुंचे तो जमकर नारेबाजी हुई. 

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Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश के नीमच जिले के रामपुरा गांव में आंगनवाड़ी केंद्र पर मधुमक्खियों के हमले से 20 मासूमों की जान बचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाली कंचन देवी मेघवाल के बलिदान के बाद जहां मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम ने संवेदनाएं व्यक्त की हैं, वहीं स्थानीय प्रशासन का रुख संवेदनहीन नजर आ रहा है. शुक्रवार को मेघवाल समाज के लोग बड़ी संख्या में कलेक्टर कार्यालय परिसर पहुंचे और कंचन बाई के परिवार को एक करोड़ रुपये की सहायता, वीरता सम्मान, अनुकंपा नियुक्ति और महिला बाल विकास अधिकारी आभा पांडे को तत्काल निलंबित करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया.

बेहद गंभीर और मानवीय संवेदनाओं से जुड़े इस मामले में जब ज्ञापन लेने अपर कलेक्टर बीएल क्लेश और डिप्टी कलेक्टर चंद्र सिंह धार्वे पहुंचे, तो समाजजन इस बात पर भड़क उठे कि जब प्रदेश के मुखिया घटना पर अपनी भावनाएं जता चुके हैं, तो जिले के कलेक्टर मौके पर आकर उनकी बात सुनने की जहमत क्यों नहीं उठा रहे हैं?

समाज के लोग कलेक्टर को ही ज्ञापन देने पर अड़ गए और कलेक्ट्रेट परिसर "कंचन बाई को न्याय दो" और "कलेक्टर होश में आओ" के नारों से गूंज उठा. एक घंटा बीत जाने के बाद भी कलेक्टर के न पहुंचने पर समाजजनों में गहरा आक्रोश देखने को मिला, जबकि ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि 2 फरवरी 2026 को कंचन बाई ने अद्भुत मातृत्व का परिचय देते हुए बच्चों की जान बचाई, जिसके बाद से उनके पैरालिसिस पीड़ित पति और बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, बावजूद इसके प्रशासन मांगों को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहा है.

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