Chaitra Navratri Day 4, Maa Kushmanda Puja Vidhi : नवरात्रि का पावन पर्व चल रहा है. मां की उपासना करने वाले भक्तों के लिए ये नौ दिन काफी खास हैं. वहीं, बुधवार यानी नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा की जाती है. पं. लक्ष्माकांत द्विवेदी कि मानें तो नवरात्रि का पर्व शक्ति का प्रतीक है. चौथे दिन मां कुष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करने वाले भक्तों कि मनोकामना पूर्ण होती हैं. वहीं, मां के भक्तों का यश और बल बढ़ता है.चलिए जानते मां कुष्मांडा की पूजा से जुड़ी हुई कुछ खास बातें...जैसे आरती, मंत्र और विधि...
मां की पूजा से बनेंगे ये काम
यदि आपके जीवन में कोई काम काफी दिनों से रुका हुआ है, उसमें रुकावट आ रही है, तो आपके लिए मां कुष्मांडा की पूजा लाभप्रद साबित हो सकती है. वहीं, मां की पूजा छात्र-छात्राओं के लिए भी उपयोगी है. मां की आराधना करने से बुद्धि की वृद्धि होती है. मां सफलता में सहायक होती हैं. ऐसा करने से मां की कृपा आपके ऊपर बन सकती है.
जानें कैसे नाम पड़ा कुष्मांडा
कुष्मांडा माता की पूजा चौथे दिन होती.क्योंकि नौ देवियों में मां का अवतरण चौथे नंबर पर हुआ था. ब्रह्मांड की रचनाकार के रूप में मां को जाना जाता है. मां ने अपनी मुस्कान से ब्रह्मांड बना दिया था. अपनी मुस्कान से पृथ्वी में व्याप्त अंधकार को भी खत्म कर दिया था. इसलिए मां का नाम कुष्मांडा पड़ा है. देवी पुराण में मां की महिमा का विस्तार से वर्णन किया गया है.
मां कुष्मांडा की पूजा विधि (Maa Kushmanda Ki poja Vidhi)
कुष्मांडा माता की पूजा कैसे करें, ये जानना भी जरूरी है. तो इसके लिए आपको सबसे पहले भोर में थोड़ा जल्दी उठना है. दैनिक क्रियाओं से निवृत होकर स्नान इत्यादि सब करके साफ वस्त्र धारण करना है. पूजा की सारी तैयारी करके पूजा स्थल पर बैठ जाना है. पूजा के लिए अपने आसन पर बैठ जाएं. फिर देवी कूष्मांडा को गंगाजल से स्नान कराएं, उसके बाद मां को अक्षत, लाल चंदन, चुनरी और लाल पीले फूल चढ़ाएं, इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें. साथ ही दुर्गा चालीसा भी पढ़ें. उसके बाद मां का पसंदीदा भोग लगाएं. उन्हें पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें. मां के मंत्रों का जाप करें और आरती करें.
आरती कुष्मांडा माता जी की (Maa Kushmanda Aarti)
कुष्मांडा माता की पूजा के दौरान आरती करना न भूलें. उपासक सुबह और शाम के वक्त पूजा के दौरान पूजा स्थल पर दीप, अगरबत्ती, फूल और नैवेद्य के साथ आरती की जाती है.
कूष्मांडा जय जग सुखदानी।
मुझ पर दया करो महारानी॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली।
शाकंबरी मां भोली भाली॥
लाखों नाम निराले तेरे।
भक्त कई मतवाले तेरे॥
भीमा पर्वत पर है डेरा।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा॥
सबकी सुनती हो जगदम्बे।
सुख पहुंचती हो मां अम्बे॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा।
पूर्ण कर दो मेरी आशा॥
मां के मन में ममता भारी।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी॥
तेरे दर पर किया है डेरा।
दूर करो मां संकट मेरा॥
मेरे कारज पूरे कर दो।
मेरे तुम भंडारे भर दो॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए॥
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