मध्य प्रदेश का शिवपुरी जिला न सिर्फ अपनी प्राकृतिक सुंदरता और सिंधिया राजवंश के इतिहास के लिए जाना जाता है, बल्कि इसका बॉलीवुड से भी एक बेहद पुराना और गहरा नाता रहा है. जब नरवर किले से 3000 किलो की ऐतिहासिक तोप की चोरी हुई है तो यह किला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. आज से करीब 4 दशक पहले ऐतिहासिक और पौराणिक नरवर किले में मायानगरी मुंबई की ऐसी हलचल हुई थी कि आज भी वहां के बुजुर्ग उस दौर को याद कर रोमांचित हो उठते हैं.
यह मौका था साल 1987 में आई मशहूर एक्शन-ड्रामा फिल्म 'डाकू हसीना' की शूटिंग का. इस फिल्म में भारतीय सिनेमा के 'थलाइवा' यानी रजनीकांत, मशहूर अभिनेता-निर्देशक राकेश रोशन और सत्तर-अस्सी के दशक की ग्लैमरस व दमदार अभिनेत्री जीनत अमान मुख्य भूमिकाओं में थे. इसके अलावा, अपनी रौबीली आवाज के लिए मशहूर दिग्गज कलाकार रजा मुराद ने भी फिल्म में एक बेहद खास और महत्वपूर्ण नकारात्मक किरदार (विलेन) निभाया था.
लगभग एक महीने तक नरवर में जमा रहा बॉलीवुड का डेरा
'डाकू हसीना' की कहानी चूंकि चंबल के बीहड़ों, डाकुओं के आत्मसम्मान और प्रतिशोध पर आधारित थी, इसलिए फिल्म के निर्देशक अशोक राव एक असली और जीवंत लोकेशन चाहते थे. इसके लिए उन्होंने नरवर के विशाल और अजेय किले को चुना.
स्थानीय जानकारों और पुराने रिकॉर्ड्स के मुताबिक, फिल्म की यूनिट लगभग 25 से 30 दिनों (करीब एक महीने) तक शिवपुरी और नरवर के आस-पास डेरा डाले हुए थी. किले के इन हिस्सों में हुए सीन नरवर किले के प्रसिद्ध कचहरी महल, छीप महल और किले की प्राचीन प्राचीर (दीवारों) पर फिल्म के कई महत्वपूर्ण दृश्यों को फिल्माया गया था.
शिवपुरी की अन्य लोकेशंस
फिल्म का लगभग 70 से 75 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के आस-पास ही शूट हुआ था, जिसमें नरवर किले के अलावा पोहरी का किला और शिवपुरी शहर में स्थित 'जीवाजी राव शिंदे की छतरी' भी शामिल है. बाकी बची 25 प्रतिशत शूटिंग मुंबई के कमल अमरोही स्टूडियो में पूरी की गई थी.
सुपरस्टार्स को देखने उमड़ती थी हजारों की भीड़
जब 1986-87 के दौर में इस फिल्म की शूटिंग चल रही थी, तब नरवर किले पर रजनीकांत, राकेश रोशन और जीनत अमान को देखने के लिए शिवपुरी ही नहीं, बल्कि ग्वालियर और गुना जिलों से भी हजारों लोगों की भीड़ रोजाना पहुंचती थी.
रजनीकांत का जलवा
रजनीकांत ने इस फिल्म में 'डाकू मंगल सिंह' का एक बेहद दमदार और एक्सटेंडेड कैमियो (विशेष भूमिका) निभाया था. जब वे डाकू के लिबास में घोड़े पर सवार होकर नरवर किले के रास्तों से गुजरते थे तो उन्हें देखने के लिए लोग पेड़ों और किले की दीवारों पर चढ़ जाते थे. वहीं, जीनत अमान का रूपा से 'डाकू हसीना' बनने का सफर भी इसी किले की वादियों में फिल्माया गया था.
3 अप्रैल 1987 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई यह फिल्म उस दौर के सिनेमा प्रेमियों के लिए एक बड़ा तोहफा थी. उस जमाने में डाकुओं और बदले की कहानियों पर आधारित फिल्मों का बहुत क्रेज था. रजनीकांत के अनोखे स्टाइल, जीनत अमान के खतरनाक डाकू अवतार और रजा मुराद की कड़क डायलॉग डिलीवरी ने दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींचने का काम किया.
इतिहास की धरोहर पर रात में डाका
जानकारी के अनुसार, 15 और 16 जुलाई की दरम्यानी रात करीब 25 से 30 हथियारबंद बदमाश नरवर किले में घुस आए. किले के ओपन कचहरी परिसर में रखी 14 ऐतिहासिक तोपों में से एक बहुमूल्य तोप को वे अपने साथ ले गए. बताया जा रहा है कि बदमाशों ने वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों को धमकाया और विरोध करने पर जान से मारने की चेतावनी दी. घटना के बाद परिसर में केवल 13 तोपें बची हैं. यह तोप सिंधिया राजवंश की 500 साल पुरानी और ऐतिहासिक महत्व वाली थी.
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