Govt. School of Madhya Pradesh: मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों का क्या हाल है, इसकी बानगी मंगलवार को नर्मदापुरम जिले में सामने आई हैं, जिसे देखकर कोई भी दांतों तले उंगली दबाने के लिए लोग मजबूर हो जाएगा. जी हां, तस्वीर बेहद भयावह हैं, क्योंकि जिले के सिवनी मालवा तहसील में स्थित सरकारी स्कूल बिना बिल्डिंग के चल रही है, जहां बच्चों को ककहरा ब्लैकबोर्ड की जगह जमीन पर लिखकर सिखाया जा रहा है.
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प्राथमिक स्कूल भवन जर्जर होने के बाद बच्चों को सार्वजिनक भवन ने शिफ्ट किया गया
रिपोर्ट के मुताबिक मालवा तहसील में स्थित प्राथमिक स्कूल की हालत जर्जर होने के बाद वहां पढ़ने वाले कुल 37 बच्चों को डेढ़ किमी दूर स्थित इकलानी गांव में स्थित एक सार्वजनिक भवन में शिफ्ट किया गया है, जहां बच्चों को पढ़ाने के लिए न तो क्लासरूम है और बेंच और डेस्क की बात करना बेमानी है. कह सकते हैं कि सार्वजनिक भवन में शिफ्ट हुए स्कूल में बच्चों की पढ़ाई का कोई बुनियादी इंतजाम तक नहीं हैं.
सार्वजनिक भवन में टीन शेड के नीचे जमीन पर बैठकर बच्चे पढ़ाई करने को हैं मजबूर
गौरतलब है कि जर्जर हो चुका स्कूल भवन पिछले दो साल से नहीं बन पाया है. सवाल है कि क्या बटकी के बच्चों को आगे भी सार्वजनिक भवन में टीन शेड के नीचे बैठकर ही पढ़ाई करनी पड़ेगी? मामले पर डीपीसी डॉ. राजेश जायसवाल का कहना है कि बटकी में स्कूल भवन निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन स्वीकृति के बाद भी तकनीकी कारणों से राज्य शिक्षा केंद्र से स्वीकृत राशि प्राप्त नहीं हो पाई, जिससे निर्माण नहीं शुरू हो पाया.
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अगले वित्तीय वर्ष में सरकारी स्कूल के भवन निर्माण की स्वीकृति मिलने की है संभावना
डीपीसी जायसवाल ने बताया कि जिला शिक्षा केंद्र और कलेक्टर की ओर से जर्जर हो चुके स्कूल भवन के निर्माण के संबंध में पत्राचार किया गया है. राज्य शिक्षा केंद्र ने इसे वार्षिक कार्य योजना में शामिल करने के निर्देश दिए हैं, जिससे अगले वित्तीय वर्ष में इसके स्वीकृति मिलने की संभावना है. उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों में बच्चों को पढ़ाने की व्यवस्था करने वाले शिक्षक की सराहना भी की है.
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