नगर कोट माता: सदियों से उज्जैन की ‘महारानी’, शहर के बाॅर्डर की रक्षक देवी

Nagarkot Mata Ujjain: क्या आप जानते हैं उज्जैन की ‘महारानी’ कौन हैं? बाबा महाकाल से भी पहले से शहर की रक्षा करती आ रही हैं नगर कोट माता. पढ़िए पूरी कहानी.

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नगर कोट माता: सदियों से उज्जैन की ‘महारानी’, शहर के बाॅर्डर की रक्षक देवी

Nagar Kot Mata Ujjain: उज्जैन को बाबा महाकाल की नगरी के रूप में जाना जाता है, जहां बाबा को नगर का राजा माना जाता है. हर साल लाखों श्रद्धालु उनके दर्शन के लिए पहुंचते हैं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस धार्मिक नगरी की एक ‘महारानी' भी हैं, जो सदियों से उज्जैन और उसके निवासियों की रक्षा कर रही हैं. शहर की सीमा पर विराजमान मां नगर कोट माता न सिर्फ आस्था का केंद्र हैं, बल्कि उज्जैन की प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक परंपरा की भी महत्वपूर्ण कड़ी हैं. नवरात्र में इनका महत्व और भी बढ़ जाता है.

Nagar Kot Mata: नगर कोट माता उज्जैन

उज्जैन की ‘रानी' कौन हैं?

जब उज्जैन की पहचान बाबा महाकाल के रूप में होती है और उन्हें नगर का राजा कहा जाता है, तब स्वाभाविक प्रश्न उठता है कि उज्जैन की रानी कौन हैं. इस प्रश्न का उत्तर है, मां नगर कोट माता. मान्यता है कि बाबा महाकाल के उज्जैन में विराजमान होने से पहले ही मां नगर कोट माता शहर की सीमाओं पर तैनात होकर उसकी रक्षा कर रही थीं.

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शहर की सीमा की रक्षक देवी

मां नगर कोट माता का मंदिर उज्जैन शहर की उत्तर‑पूर्व दिशा में गोवर्धन सागर के समीप स्थित है. ‘नगर' का अर्थ शहर और ‘कोट' का अर्थ परिधि या सीमा होता है. इसी वजह से मां नगर कोट माता को शहर की सीमा की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है. स्थानीय श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वह हर संकट से शहर और उसके लोगों की रक्षा करती हैं.

स्कंद पुराण में उल्लेख, दुर्गा का सातवां रूप

धार्मिक ग्रंथ स्कंद पुराण में भी मां के नगर कोट स्वरूप का वर्णन मिलता है. इसे मां दुर्गा का सातवां रूप माना गया है. मंदिर में मां को अस्त्र‑शस्त्र धारण किए हुए दर्शाया गया है, जो हर संकट और बाधा को काटने की शक्ति का प्रतीक है. इसी कारण यह मंदिर न सिर्फ उज्जैन बल्कि पूरे देश में श्रद्धा और आस्था का केंद्र माना जाता है.

नवरात्र में विशेष महत्व

चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान मां नगर कोट माता के मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. नवरात्र के नौ दिनों तक मां का भव्य और अद्भुत श्रृंगार किया जाता है. भक्त मंदिर परिसर में स्थित पवित्र कुंड के जल से मां का अभिषेक करते हैं. मान्यता है कि इस जल में विशेष चमत्कारी गुण हैं.

सरकारी पदस्थापना से पहले आशीर्वाद की परंपरा

स्थानीय परंपरा के अनुसार, उज्जैन में जब किसी अधिकारी की सरकारी पद पर नियुक्ति होती है, तो कार्यभार संभालने से पहले नगर कोट माता का आशीर्वाद लेना आवश्यक माना जाता है. इसे शुभ और सफल कार्यकाल का प्रतीक माना जाता है.

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सम्राट विक्रमादित्य से जुड़ा इतिहास

मंदिर का इतिहास सम्राट विक्रमादित्य के काल से जुड़ा बताया जाता है. मान्यता है कि युद्ध से पहले सम्राट विक्रमादित्य मां नगर कोट माता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए अवश्य आते थे. उन्हीं के शासनकाल में मंदिर का निर्माण बड़े पैमाने पर कराया गया.

भैरव और भगवान विष्णु की प्रतिमाएं

मां नगर कोट माता की रक्षा के लिए मंदिर परिसर में भैरव और भगवान विष्णु की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. श्रद्धालु मनोकामना पूर्ति, भय‑मुक्ति और संकटों के निवारण के लिए यहां आकर दर्शन करते हैं और मां से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.

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