समर्थन मूल्य पर खरीदी में बड़ा घोटाला, किसानों की उपज में 40% तक मिट्टी की मिलावट! 

सरकार की MSP योजना के तहत सरसों खरीदी में बड़ा घोटाला सामने आया है. रहली क्षेत्र में खरीदी गई सरसों में 40 प्रतिशत तक मिट्टी से बने नकली दानों की मिलावट पाई गई.

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MSP Mustard Scam: सरकार की समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजना, जिसका मकसद किसानों को उनकी फसल का उचित दाम दिलाना होता है, उसी व्यवस्था में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है. सागर जिले के रहली क्षेत्र में पिछले वर्ष समर्थन मूल्य पर खरीदी गई सरसों में बड़े पैमाने पर मिलावट का मामला उजागर हुआ है.

जांच में सामने आया है कि सरसों की बोरियों में मिट्टी से बने नकली दाने मिलाए गए थे, जिसकी मात्रा 35 से 40 प्रतिशत तक बताई जा रही है. इस मामले ने न केवल किसानों के हितों पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि पूरी खरीदी और भंडारण व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी गंभीर संदेह पैदा कर दिया है.

शिकायत से शुरू हुआ मामला

यह पूरा प्रकरण रंजीत कुमार सिंह (45 वर्ष), निवासी वाराणसी, वर्तमान निवासी भोपाल द्वारा प्रस्तुत लिखित शिकायत से सामने आया. शिकायत में बताया गया कि रबी विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान भारत सरकार की समर्थन मूल्य योजना के अंतर्गत नेफेड द्वारा सरसों की खरीदी की गई थी. रहली क्षेत्र की कृषक उपज मंडी में यह खरीदी सेवा सहकारी समिति छिरारी और सेवा सहकारी समिति रहली उपकेंद्र खैराना के माध्यम से की गई.

वेयरहाउस में रखी गई संदिग्ध सरसों

खरीदी गई सरसों को मप्र वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन, रहली के गोदाम क्रमांक-10 में भंडारित किया गया था. जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि खरीदी के समय किसी भी बोरी पर किसान कोड अंकित नहीं था, जबकि यह अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है. सरसों की गुणवत्ता जांच एनसीएमएल के सर्वेयर अभिषेक दुबे (सागर) और पुष्पेंद्र साहू (केसली) द्वारा की गई थी, जिसके बाद भंडारण की अनुमति दी गई.

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बिक्री के बाद सामने आई मिलावट की सच्चाई

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब नेफेड भोपाल द्वारा सरसों का विक्रय किया गया. क्रेता फर्म मेसर्स शिवशक्ति सागर ट्रेडिंग कंपनी, टांक देवरी (राजनांदगांव) ने सरसों में नकली दानों की शिकायत की. शिकायत के बाद अधिकारियों ने संयुक्त निरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की.

पानी परीक्षण में उजागर हुआ बड़ा खेल

14 अक्टूबर 2025 को संयुक्त टीम द्वारा निरीक्षण और पंचनामा किया गया. पानी से किए गए परीक्षण में यह साफ हो गया कि सरसों में मिट्टी से तैयार किए गए नकली दाने मिलाए गए थे. सरसों को पानी में डालते ही बड़ी मात्रा में दाने तैरने लगे, जिससे मिलावट की पुष्टि हुई. जांच में पाया गया कि प्रति क्विंटल सरसों में लगभग 35 से 40 प्रतिशत तक नकली दानों की मिलावट थी.

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हजारों क्विंटल सरसों पर असर

जांच रिपोर्ट के अनुसार छिरारी और खैराना समितियों द्वारा कुल लगभग 8,950 क्विंटल सरसों का भंडारण किया गया था. इसमें से 8,693 क्विंटल सरसों पहले ही विक्रय की जा चुकी है, जबकि करीब 257 क्विंटल सरसों फिलहाल वेयरहाउस में रखी हुई है. इतने बड़े पैमाने पर मिलावट का असर किसानों की मेहनत और सरकारी खजाने, दोनों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.

पांच आरोपियों पर दर्ज हुआ केस

प्रथम दृष्टया धोखाधड़ी, कूट रचना और उपार्जन नीति के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद रहली थाना पुलिस ने कार्रवाई की है. सेवा सहकारी समिति छिरारी के संचालक विजय कुमार जैन, सेवा सहकारी समिति रहली उपकेंद्र खैराना के संचालक जगदीश लोधी, एनसीएमएल सर्वेयर अभिषेक दुबे और पुष्पेंद्र साहू, तथा मप्र वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन की तत्कालीन शाखा प्रबंधक वर्षा तोमर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(3), 274 एवं खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 48 और 49 के तहत अपराध दर्ज किया गया है. फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है. 

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