MP Rain Alert: मध्य प्रदेश में मानसून पूरी तरह से मेहरबान नजर आ रहा है. लगातार सक्रिय तीन मजबूत मौसम प्रणालियों के असर से पिछले करीब 60 घंटे से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में रुक-रुककर तेज बारिश का दौर जारी है. मौसम विभाग (IMD) ने गुरुवार 23 जुलाई को 17 जिलों में भारी से अति भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. वहीं भोपाल और इंदौर समेत कई प्रमुख शहरों में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला बना रहेगा.
MP के 17 जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट
- अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट: आलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन में अति भारी बारिश को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
- भारी बारिश का अलर्ट: नीमच, रतलाम, उज्जैन, इंदौर, सीहोर, सिवनी, मंडला, बालाघाट, उमरिया, रीवा, मऊगंज, सीधी और सिंगरौली में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है.
- गरज-चमक के साथ बारिश: भोपाल, रायसेन, विदिशा, राजगढ़, ग्वालियर, जबलपुर, कटनी, सागर, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, देवास, शाजापुर और मंदसौर में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है.
mp weather update: मध्य प्रदेश में 3 सिस्टम सक्रिय होने से 60 घंटे से लगातार बारिश जारी है.
इन 3 मॉनसून सिस्टम से हो रही झमाझम बारिश
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रदेश के ऊपर एक साथ तीन शक्तिशाली मौसम प्रणालियां काम कर रही हैं. प्रदेश के ऊपर 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण सबसे ज्यादा प्रभावी है. बीकानेर से बंगाल की खाड़ी तक फैली मानसून द्रोणिका लगातार नमी पहुंचा रही है. पूर्व-पश्चिम शियर जोन ऊपरी वायुमंडल में बादलों को तेजी से विकसित कर रहा है.
40 से ज्यादा जिलों में बरसे बादल, घट गया बारिश का कोटा
इससे पहले बुधवार 22 जुलाई को प्रदेश के 40 से अधिक जिलों में हुई झमाझम बारिश से नदियां, बांध और जलाशय लबालब होने लगे हैं. इस 60 घंटे की बारिश से प्रदेश में बारिश का घाटा तेजी से कम हुआ है. सोमवार तक जो बारिश सामान्य से 17 प्रतिशत कम थी, वह अब घटकर 11 प्रतिशत रह गई है. प्रदेश में अब तक औसतन 12.1 इंच (307.9 मिमी) बारिश दर्ज की जा चुकी है.
एमपी में कहां सबसे ज्यादा और कम बारिश
प्रदेश में बारिश के आंकड़ों की बात करें तो देवास 18.5 इंच बारिश के साथ सबसे आगे चल रहा है. बालाघाट में 18 इंच, सीहोर में 17.2 इंच और राजधानी भोपाल में 16.4 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है. वहीं दूसरी ओर आलीराजपुर में अब तक सबसे कम (महज 2.5 इंच) वर्षा दर्ज की गई है.