MP Transfer: एमपी में स‍िर्फ 15 द‍िन के ल‍िए खुली ट्रांसफर विंडो, जान‍िए तबादलों के नियम व शर्तें

mp transfer policy 2026: मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने 'स्थानांतरण नीति 2026' को मंजूरी दे दी है. राज्य में 1 जून से 15 जून 2026 तक तबादलों पर लगा प्रतिबंध हटेगा. जानिए किस श्रेणी के कर्मचारियों के ट्रांसफर कैसे होंगे और सरकार ने क्या नए नियम तय किए हैं?

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MP Transfer Policy 2026: मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए बड़ी खबर है. मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार ने राज्य की नई 'स्थानांतरण नीति 2026' को हरी झंडी दे दी है. इसके तहत एमपी में लंबे समय से सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के तबादलों पर लगा प्रतिबंध 1 जून 2026 से 15 जून 2026 तक के लिए हटा लिया गया है. इस 15 दिन की अवधि में राज्य और जिला स्तर पर ट्रांसफर किए जा सकेंगे. सरकार द्वारा जारी नीति में स्वैच्छिक और प्रशासनिक दोनों तरह के तबादलों के लिए कड़े नियम और सीमाएं तय की गई हैं.

इन सेवाओं पर लागू नहीं होगी नीति

इस नीति के तहत कुछ खास सेवाओं को अलग रखा गया है. मध्य प्रदेश न्यायिक सेवा, राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, राज्य वन सेवा और मध्य प्रदेश मंत्रालय के कर्मचारियों पर यह नीति लागू नहीं होगी. यदि ये विभाग अपने स्तर पर कोई बदलाव करना चाहते हैं, तो वे मुख्यमंत्री की मंजूरी से अलग नीति बना सकेंगे. 

 

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MP Transfer Policy 2026: मोहन सरकार ने नई तबादला नीति को दी मंजूरी, 1 से 15 जून तक हटबेगा प्रतिबंध; यहाँ पढ़ें नियम व शर्तें

किसे दिया गया है ट्रांसफर का अधिकार?

जिले के भीतर (तृतीय और चतुर्थ श्रेणी): तीसरी और चौथी श्रेणी के कर्मचारियों का जिले के अंदर ट्रांसफर प्रभारी मंत्री की मंजूरी से जिला कलेक्टर द्वारा किया जाएगा.

राज्य स्तर पर (प्रथम, द्वितीय और तृतीय श्रेणी): इनका ट्रांसफर राज्य के भीतर प्रशासनिक विभाग द्वारा विभागीय मंत्री के अप्रूवल से किया जाएगा.

पुलिस विभाग में: गृह विभाग में डीएसपी (DSP) स्तर से छोटे अधिकारियों/कर्मचारियों का ट्रांसफर पुलिस स्थापना बोर्ड या जिले के भीतर एसपी (SP) द्वारा प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से होगा.

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डिप्टी कलेक्टर और तहसीलदार: जिले के अंदर डिप्टी कलेक्टर और संयुक्त कलेक्टर का अनुभाग परिवर्तन और तहसीलदार-नायब तहसीलदार की पोस्टिंग प्रभारी मंत्री की सलाह पर होगी.

पदों की संख्या के हिसाब से तय हुआ प्रतिशत

सरकार ने विभागों में कुल पदों के हिसाब से ट्रांसफर का एक फॉर्मूला तय किया है, ताकि एक साथ बहुत ज्यादा तबादले न हों:

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  • 200 तक पद होने पर: कुल पदों का अधिकतम 20% ट्रांसफर.
  • 201 से 1000 तक पद होने पर: 40 + (कुल पद - 200 का 15%)
  • 1001 से 2000 तक पद होने पर: 160 + (कुल पद - 1000 का 10%)
  • 2001 से अधिक पद होने पर: 260 + (कुल पद - 2000 का 5%)

बीमार और बुजुर्ग कर्मचारियों को बड़ी राहत

मोहन सरकार ने नई नीति में मानवीय पहलुओं का भी खास ध्यान रखा है.

  • रिटायरमेंट के करीब वाले कर्मचारी: जिन कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति में एक साल या उससे कम का समय बचा है, उनका ट्रांसफर सामान्य तौर पर नहीं किया जाएगा.
  • गंभीर बीमारी पर राहत: कैंसर, किडनी खराब होना, लकवा या दिल का दौरा जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों का तबादला मेडिकल बोर्ड की सिफारिश पर प्राथमिकता के आधार पर किया जा सकेगा.

पिछले 7 सालों में कब-कब खुली ट्रांसफर विंडो?

मध्य प्रदेश में इस साल (2026) कर्मचारियों को ट्रांसफर के लिए सबसे कम समय मिल रहा है. पिछले सालों की तुलना में इस बार की ट्रांसफर विंडो सिर्फ 15 दिनों की है.  साल 2019 में सबसे ज्यादा 35 दिनों के लिए तबादले हुए थे, जबकि इस साल यानी 2026 में सबसे कम सिर्फ 15 दिन का समय कर्मचारियों को मिलेगा.

  • 2026: 1 जून से 15 जून तक (कुल 15 दिन)
  • 2025: 1 मई से 30 मई (कुल 30 दिन)
  • 2023: 15 जून से 7 जुलाई (कुल 22 दिन)
  • 2022: 17 सितंबर से 5 अक्टूबर (कुल 20 दिन)
  • 2021: 1 जुलाई से 31 जुलाई (कुल 31 दिन)
  • 2020: कोरोना लॉकडाउन के कारण पॉलिसी लागू नहीं हुई
  • 2019: 5 जून से 5 जुलाई (कुल 35 दिन)

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