MP Salary Hike: एक लाख संविदा कर्मचारियों का 4% बढ़ा वेतन, अब हर महीने मिलेंगे इतने हजार रुपये

मध्य प्रदेश सरकार ने 1 लाख से अधिक संविदा कर्मचारियों के वेतन में 4.46% की बढ़ोतरी का ऐलान किया है. यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी, जिससे कर्मचारियों की सैलरी हर महीने 1000 से 3800 रुपये तक बढ़ेगी.

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मध्य प्रदेश के संविदा कर्मचारियों के लिए लंबे इंतजार के बाद राहत भरी खबर आई है. राज्य सरकार ने एक लाख से ज्यादा संविदा अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी का फैसला किया है. वित्त विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं और नई दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी. इस फैसले से कर्मचारियों की हर महीने की आय में सीधा इजाफा होगा, जिससे उन्हें आर्थिक राहत मिलेगी.

वेतन में 4.46% की बढ़ोतरी लागू

सरकार की ओर से जारी आदेश के अनुसार संविदा कर्मचारियों के पारिश्रमिक में 4.46 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि की गई है. इसका लाभ प्रदेश के करीब एक लाख कर्मचारियों और अधिकारियों को मिलेगा. यह बढ़ोतरी सीधे उनके मासिक वेतन में जुड़कर दिखाई देगी.

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हर महीने बढ़ेगी 1000 से 3800 रुपये तक सैलरी

नई वेतन दर लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में हर महीने करीब 1000 रुपये से लेकर 3800 रुपये तक का इजाफा होगा. इससे न सिर्फ उनकी आमदनी बढ़ेगी बल्कि महंगाई के दौर में उन्हें राहत भी मिलेगी. संविदा कर्मचारी संघ काफी समय से वेतन बढ़ाने की मांग कर रहा था. सरकार के इस फैसले के बाद कर्मचारियों में खुशी का माहौल है. कई संगठनों ने इसे राहत भरा कदम बताते हुए सरकार का आभार भी जताया है.

CPI के आधार पर तय होती है वृद्धि

यह बढ़ोतरी सामान्य प्रशासन विभाग की 22 जुलाई 2023 की संविदा नीति के आधार पर की गई है. इस नीति के तहत हर साल उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर पारिश्रमिक में वृद्धि की जाती है, ताकि कर्मचारियों पर महंगाई का असर कम हो सके.

पिछले साल से ज्यादा मिला फायदा

इस बार की वृद्धि पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है. पिछले वर्ष संविदा कर्मचारियों के वेतन में 2.94 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई थी, जबकि इस बार अप्रैल 2026 के हिसाब से इसे बढ़ाकर 4.46 प्रतिशत कर दिया गया है. इससे साफ है कि इस बार कर्मचारियों को ज्यादा लाभ मिला है. 

वेतन वृद्धि के इस फैसले से कर्मचारियों को आर्थिक तौर पर बड़ी राहत मिलेगी. खासकर उन लोगों के लिए यह खबर राहत भरी है, जो लंबे समय से महंगाई और सीमित आय के बीच संतुलन बनाने में मुश्किल का सामना कर रहे थे.

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