MP Prasannajit released by Pakistan: बालाघाट के खैरलांजी महकेपार गांव का रहने वाला प्रसन्नजीत करीब सात साल बाद पाकिस्तान से अपने वतन लौटा. वो पिछले सात सालों से पाकिस्तान के जेल में बंद था. वहीं प्रसन्नजीत के खैरलांजी महकेपार पहुंचने पर परिजनों में खुशी का माहौल है. उन्होंने प्रसन्नजीत का तिलक वंदन कर स्वागत किया. प्रसन्नजीत के घर लौटने के बाद काफी संख्या में ग्रामीण उसके घर पहुंचे.
अमृतसर के रास्ते बालाघाट पहुंचे प्रसन्नजीत
जानकारी के मुताबिक, प्रसन्नजीत अमृतसर से सिवनी होते हुए कटंगी पहुंचें. बता दें कि विधायक गौरव पारधी, स्थानीय लोग, जनपद सीईओ, एसडीओपी और थाना प्रभारी सहित अन्य प्रशासन ने अमृतसर के रास्ते प्रसन्नजीत को मध्य प्रदेश लाने की योजना बनाई. इसके बाद एक चार पहिया वाहन में प्रसन्नजीत के जीजा, सचिव, रोजगार सहायक, पुलिस और राजस्व का अमला को अमृतसर भेजा गया. वहीं प्रसन्नजीत को अपने घर भेजने की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें टीम के साथ रवाना किया गया. हालांकि इससे पहले टीम प्रसन्नजीत के साथ अमृतसर में स्वर्ण मंदिर गई.
7 साल से पाकिस्तान जेल में बंद थे प्रसन्नजीत रंगारी
31 जनवरी 2026 को पाकिस्तान से 7 भारतीय कैदियों को रिहा किया गया था, जिसमें बालाघाट के खैरलांजी निवासी प्रसन्नजीत रंगारी भी शामिल थे. प्रसन्नजीत बीते 7 सालों से पाकिस्तान की जेल में सुनील अदे नाम से बंद था. बता दें कि बी-फार्मेसी करने वाला प्रसन्नजीत रंगारी अचानक मानसिक रूप से बीमार हो गया. इसी दौरान वो साल 2017-18 में घर से अचानक लापता हो गया. वो यहां से निकलने के बाद बिहार चला गया. हालांकि फिर वो वापस घर लौट आया था, लेकिन उसके बाद 2019 में फिर वो लापता हो गया. जिसके बाद उसकी कोई खबर नहीं मिली.
ऐसे परिवार को प्रसन्नजीत का चला पता
परिजनों ने काफी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. हालांकि दिसंबर 2021 में एक फोन आया और पता चला कि उनका भाई प्रसन्नजीत पाकिस्तान की जेल में बंद है. परिजनों को पता चला था कि 1 अक्टूबर 2019 में प्रसन्नजीत को पाकिस्तान के बाटापुर से हिरासत में लिया गया, जहां वो सुनिल अदे के नाम से बंद है.
प्रसन्नजीत के पाकिस्तान जेल में बंद होने की जानकारी मिलने के बाद उसकी बहन संघमित्रा अपने भाई के वतन वापसी के लिए लगातार संघर्ष में जुटी रही. वहीं काफी संघर्ष करने के बाद आखिरकर प्रसन्नजीत रिहा हो गया. बता दें कि बार्डर पर अधिकारियों के साथ औपचारिक कार्रवाई के बाद प्रसन्नजीत को भारतीय अधिकारियों के हवाले किया गया.