Success Story: ईंट भट्टे पर मजदूरी करने वाले के बेटे ने रचा इतिहास, AIR में 293 वीं रैंक लाकर वैज्ञानिक

मध्यप्रदेश के धार जिले के धरमपुरी निवासी मनीष प्रजापति ने गरीबी को मात देकर नया इतिहास रच दिया है. ईंट भट्टे पर मजदूरी करने वाले के बेटे मनीष ने GATE परीक्षा में 293वीं रैंक हासिल की है. अब उनका चयन देश के प्रमुख परमाणु संस्थान NPCIL में वैज्ञानिक अधिकारी के पद पर हुआ है.

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कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों और हौसले बुलंद, तो गरीबी भी सपनों की राह में रोड़ा नहीं बन सकती. मध्यप्रदेश के धार जिले के धरमपुरी निवासी मनीष प्रजापति ने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से इस बात को साबित कर दिखाया है. ईंट भट्टे पर दिन-रात मजदूरी करने वाले पिता के बेटे मनीष ने GATE परीक्षा में ऑल इंडिया 293वीं रैंक हासिल कर देश के प्रमुख परमाणु संस्थान NPCIL में वैज्ञानिक अधिकारी का पद हासिल किया है. उनकी इस सफलता ने न सिर्फ एक परिवार की तकदीर बदली है, बल्कि पूरे धार जिले का नाम रोशन कर दिया है.

गरीबी को दी मात, GATE में लहराया परचम

मनीष प्रजापति ने GATE-2026 की इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन शाखा की कठिन परीक्षा में ऑल इंडिया 293वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है. इस शानदार प्रदर्शन के दम पर उनका चयन देश के प्रतिष्ठित संस्थान न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) में वैज्ञानिक अधिकारी (इलेक्ट्रॉनिक्स) के पद पर हुआ है. सीमित संसाधनों और आर्थिक तंगी के बीच पले-बढ़े मनीष की यह सफलता उनकी सालों की अटूट तपस्या का परिणाम है.

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मुंबई में इंटरव्यू और अब रावतभाटा में ट्रेनिंग

वैज्ञानिक अधिकारी के 50 पदों के लिए NPCIL ने देशभर से लगभग 600 मेधावी अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया था. मनीष का साक्षात्कार 11 जून 2026 को मुंबई के अणुशक्ति नगर स्थित NPCIL मुख्यालय में हुआ था. इसके बाद 3 जुलाई को घोषित अंतिम परिणाम में उनका चयन वैज्ञानिक अधिकारी के रूप में पक्का हो गया. अब मनीष 1 अगस्त 2026 से राजस्थान के रावतभाटा स्थित NPCIL प्रशिक्षण केंद्र में एक साल का विशेष प्रशिक्षण लेंगे, जिसके बाद वे देश के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अपनी सेवाएं देना शुरू करेंगे.
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संघर्ष से सफलता तक, युवाओं के लिए बने मिसाल

मनीष की यह कामयाबी सिर्फ एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण है जो अभावों के बीच बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं. ईंट भट्टे पर मजदूरी करने वाले पिता के पसीने की बूंदों और बेटे के अनवरत संघर्ष ने यह साबित कर दिया कि मंजिल उन्हीं को मिलती है जो कठिन परिस्थितियों के आगे घुटने नहीं टेकते. मनीष ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, दादी, अंकल, बहनों, स्कूल के गुरुजनों और अपनी कोचिंग को दिया है. उनकी इस उपलब्धि पर पूरे क्षेत्र में जश्न से बधाइयों का तांता लगा हुआ है.
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