ग्वालियर का पुलिस ट्रेनिंग सेंटर तिघरा बना नया 'ऑक्सीजन हब', 16 हजार पौधों ने बदली बंजर जमीन की तस्वीर

ग्वालियर के तिघरा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर  की 172 एकड़ बंजर भूमि अब 16 हजार पौधों की बदौलत 'ऑक्सीजन हब' बन चुकी है. एडीजी राजाबाबू सिंह की पहल और जवानों की मेहनत से बिना किसी सरकारी बजट के यह कारनामा हुआ है.

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मध्‍य प्रदेश के ग्वालियर का तिघरा पुलिस ट्रेनिंग सेंटर इलाका, जो कभी बंजर और सूखी जमीन के रूप में जाना जाता था, आज हरियाली से सराबोर हो चुका है. पुलिस ट्रेनिंग स्कूल तिघरा के जवानों और अधिकारियों की कड़ी मेहनत से यहां करीब 16 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिन्होंने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी है. अब यह क्षेत्र एक नए 'ऑक्सीजन हब' के रूप में अपनी पहचान बना रहा है.

मंगलवार को इस बड़ी कामयाबी के उपलक्ष्य में पीटीएस तिघरा में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में एडीजी राजाबाबू सिंह, ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान और ग्वालियर आईजी अरविंद सक्सेना समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए.

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बिना सरकारी बजट के जनभागीदारी से हुआ कमाल

अनूठे अभियान की शुरुआत अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) राजाबाबू सिंह की पहल पर की गई थी. इस पूरे पौधारोपण अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें किसी भी तरह के सरकारी बजट का उपयोग नहीं किया गया. समाज के विभिन्न वर्गों और स्थानीय लोगों के सहयोग (जनभागीदारी) से पौधे लगाए गए और उनकी देखभाल की व्यवस्था की गई. मात्र एक साल के भीतर ही इन पौधों ने बेहतरीन विकास किया है और पूरे इलाके में हरियाली साफ नजर आने लगी है.

172 एकड़ बंजर भूमि पर लहराई हरियाली

तिघरा बांध के पास लगभग 172 एकड़ भूमि लंबे समय से बंजर और सूखी पड़ी थी. इस जमीन को हरा-भरा बनाने का सपना देखा गया और जुलाई 2025 में बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान की शुरुआत हुई. इस अभियान के तहत नीम, पीपल, गुलर, करंज, शीशम, बांस, सागौन, सहजन, गुलमोहर, अमलतास, सफेद मूसली और इमली सहित करीब 100 अलग-अलग प्रजातियों के पौधों को इस क्षेत्र में विकसित किया जा रहा है.

जवानों ने की जैविक तरीके से देखभाल

इस हरित अभियान में पुलिस प्रशिक्षण स्कूल के प्रशिक्षु जवानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. अधिकारियों के मुताबिक, पौधों की नियमित निगरानी की जा रही है और उन्हें पूरी तरह से जैविक तरीके से तैयार किया जा रहा है. पौधों की सुरक्षा और सिंचाई के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, यही वजह है कि पौधों के जीवित रहने की दर काफी बेहतर रही है.

ADG राजाबाबू सिंह को मिलेगा राज्य स्तरीय पुरस्कार

इस पर्यावरण संरक्षण अभियान की शानदार सफलता को देखते हुए मध्यप्रदेश राज्य जैव विविधता बोर्ड ने वर्ष 2025 के राज्य स्तरीय जैव विविधता पुरस्कारों में एडीजी राजाबाबू सिंह को शासकीय श्रेणी में प्रथम पुरस्कार के लिए चुना है. इस पुरस्कार के तहत उन्हें एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि, प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी प्रदान की जाएगी. यह सम्मान उन्हें जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए दिया जा रहा है.

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अगला लक्ष्य: 14 हजार और पौधे लगाने की तैयारी

एडीजी राजाबाबू सिंह का कहना है कि तिघरा के आसपास की बंजर जमीन को हरियाली से भरना उनका एक सपना था, जिसे सभी के सामूहिक सहयोग से साकार किया गया है. उन्होंने बताया कि 16 हजार पौधे पहले ही लगाए जा चुके हैं और अब अगले चरण में 14 हजार और पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. इन पौधों की देखभाल तब तक निरंतर की जाएगी, जब तक कि वे पूरी तरह विशाल पेड़ नहीं बन जाते.

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