MP वक्फ बोर्ड की नई कार्यकारिणी में हिंदू सदस्यों को शामिल करने पर रार,  कांग्रेस और AIMIM ने किया करारा प्रहार

मध्य प्रदेश सरकार की ओर से वक्फ बोर्ड की नई कार्यकारिणी में दो हिंदू सदस्यों की एंट्री से राज्य में सियासत गरमाने लगी है. कांग्रेस और एमआईएम के साथ ही वक्फ के जानकार भी सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि जब हिंदू मठ और मंदिरों की समितियों में कोई दूसरे धर्म का नहीं होता है, तो फिर मुस्लिमों की दान की संपत्तियों की देखरेख करने वाली वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिमों को सदस्य क्यों बनाया गया है?

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विपक्षी दल कांग्रेस के साथ ही एआईएमआईएम ने भी बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का विरोध किया है.
NDTV

MP Waqf Board new executive committee: मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड (Madhya Pradesh Waqf Board) ने अपनी नई कार्यकारिणी घोषित कर दी है. वक्फ (संशोधन) अधिनियम 2025 के तहत राज्य में पहली बार दो हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है. इंदौर के मनोज मालपानी और गुना के अनिमेष भार्गव को बोर्ड में सदस्य बनाया गया है. राजधानी भोपाल के बाद बुरहानपुर में भी वक्फ की सबसे ज्यादा संपत्तियां बताई जाती हैं. लिहाजा, यहां इस फैसले का जमकर विरोध हो रहा है. विपक्षी दल कांग्रेस के साथ ही एआईएमआईएम ने फैसले का कड़ा विरोध किया है.

दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने रविवार को वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन का नोटिफिकेशन जारी कर दिया. नए प्रावधानों के मुताबिक बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्य अनिवार्य हैं. राज्य सरकार का कहना है कि यह पारदर्शिता लाएगा, संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार करेगा और सभी समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा, लेकिन बुरहानपुर में इस पर नाराजगी देखने को मिल रही है. यहां कांग्रेस और एआईएमआईएम इस फैसले का विरोध कर रही है. इन दोनों ही पार्टियों के नेताओं का कहना कि वक्फ मुस्लिमों की धार्मिक संपत्ति संबंधी संस्था है. ऐसे में इसमें गैर-मुस्लिमों को शामिल करना हस्तक्षेप है. 

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कांग्रेस नेता ने किया संसद के घेराव का ऐलान

इस पूरे मामले पर अल्पसंख्यक कांग्रेस के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ फरीद काजी ने कहा कि भोपाल के बाद बुरहानपुर में वक्फ संपत्तियां सबसे ज्यादा हैं. दरअसल, यहां कई ऐतिहासिक मस्जिदें, कब्रिस्तान और अन्य संपत्तियां वक्फ के अधीन हैं. दोनों दल मांग कर रहे हैं कि बुरहानपुर से भी बोर्ड में प्रतिनिधित्व मिले. इस मसले को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. फरीद काजी ने बताया कि आगामी 28 जुलाई को उनके राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद इमरान प्रतापगढ़ी के नेतृत्व में संसद का घेराव कर मप्र के वक्फ के मुद्दे को उठाया जाएगा.

दोनों हिंदू सदस्यों के नाम वापस लेने की मांग

विपक्षी दल कांग्रेस के साथ ही हैदराबाद से सांसद असद उद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने भी मध्य प्रदेश सरकार के इस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है. पार्टी के मध्य प्रदेश अनुशासन समिति के अध्यक्ष नफीस मंशा खान का कहना है कि सरकार के इस फैसले का विरोध करते हैं. इसके साथ ही हम सरकार से यह मांग करते हैं कि वक्फ बोर्ड में जो दो गैर मुस्लिमों के नाम हैं, उसे वापस लिया जाए और बुरहानपुर से भी किसी प्रतिनिधि को मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में शामिल किया जाए. 

मंदिर मठ की समिति में मुस्लि नहीं, तो वक्फ में हिंदू क्यों?

वक्फ मामले के जानकार और बुरहानपुर के पूर्व विधायक हमीद काजी ने भी प्रदेश सरकार के इस कदम की आलोचना की है. उन्होने कहा कि जब किसी मंदिर मठ की समिति में किसी गैर हिंदू को सदस्य नहीं बनाया जाता, तो फिर वक्फ बोर्ड में किसी गैर मुस्लिम को सदस्य क्यों बनाया गया? उन्होने दोहराया कि बुरहानपुर में भी वक्फ की काफी संपत्ति है, लिहाजा मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में बुरहानपुर से भी किसी सदस्य को शामिल किया जाना चाहिए. 

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उधर, बीजेपी सरकार का बचाव करते हुए बीजेपी के अल्पसंख्यक नेता एडवोकेट शाकिर ने कहा हम बीजेपी सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं.  उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन बिल पास होने के बाद देश में मध्य प्रदेश पहला ऐसा राज्य बन गया, जहां इसके हिसाब से टीम का गठन किया गया है. उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्ति का संरक्षण करना हरेक नागरिक का काम है. 

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