MP Economic Survey 2025-26: मध्य प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण ने इस बार प्रदेश की अर्थव्यवस्था की एक बड़ी और चमकदार तस्वीर सामने रखी है. ₹16.69 लाख करोड़ का आकार, 11% से ज्यादा की नाममात्र वृद्धि और 8% की वास्तविक ग्रोथ. सुनने में यह सब बेहद सकारात्मक लगता है. लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं कि आंकड़े कितने बड़े हैं, बल्कि यह भी कि यह विकास कितना व्यापक है और कौन‑कौन इसका असली फायदा उठा रहे हैं. यही कारण है कि इस सर्वेक्षण को समझने के लिए सिर्फ आंकड़ों को नहीं, बल्कि उनके पीछे छिपी हकीकत को भी देखना जरूरी है.
GSDP में उछाल, लेकिन वृद्धि कितनी टिकाऊ?
2025‑26 में राज्य का GSDP ₹16.69 लाख करोड़ आंका गया है, जो पिछले साल की तुलना में 11.14% अधिक है. महंगाई को समायोजित करने पर वास्तविक वृद्धि दर 8.04% निकलती है. इससे साफ है कि अर्थव्यवस्था विस्तार कर रही है, लेकिन यह विस्तार किन क्षेत्रों में ज्यादा है और इसके लाभ कितने व्यापक हैं, यह सवाल अभी भी बना हुआ है.
आय चार गुना बढ़ी, लेकिन असमानता के सवाल बरकरार
2011‑12 में प्रति व्यक्ति आय ₹38,497 थी जो 2025‑26 में बढ़कर ₹1,69,050 हो गई. वास्तविक आय भी ₹76,971 पर पहुंच गई है. यह 14 वर्षों में लगभग चार गुना उछाल है. लेकिन यह सर्वेक्षण यह नहीं बताता कि ग्रामीण‑शहरी आय का अंतर कितना घटा है. क्या किसान, खेतिहर मजदूर और असंगठित कामगार भी इस वृद्धि का हिस्सा बने हैं या फिर आय बढ़ने की चमक सिर्फ चुनिंदा वर्ग तक ही सीमित है?
अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा सहारा अभी भी कृषि
राज्य की अर्थव्यवस्था में प्राथमिक क्षेत्र का योगदान 43.09% है. यानी लगभग आधी अर्थव्यवस्था आज भी कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर टिकी है. फसलों का योगदान 30.17%, पशुपालन का 7.22% और मत्स्य‑वानिकी का हिस्सा इससे भी कम है. कृषि में 7.31% की वृद्धि जरूर दिखती है, लेकिन यह भी सवाल है कि उत्पादन बढ़ने के बावजूद किसान की वास्तविक आय कितनी बदली?
उद्योग बढ़ा, पर औद्योगिकीकरण की दूरी लंबी
सेकेंडरी सेक्टर का आकार ₹3.12 लाख करोड़ है और इसमें 9.93% वृद्धि दर्ज की गई. निर्माण क्षेत्र 9.22% और विनिर्माण 7.22% बढ़ा है. यह संकेत जरूर देता है कि उद्योगों में रफ्तार आ रही है, लेकिन जब कृषि 43% और उद्योग सिर्फ 19.79% हिस्सेदारी रखता है, तो यह भी साफ है कि औद्योगिक विकास की यात्रा अभी अधूरी है.
सेवा क्षेत्र तेजी से बढ़ा, लेकिन रोजगार का सवाल महत्वपूर्ण
सेवा क्षेत्र ने 15.80% की तेज वृद्धि दर्ज की है और यह अब ₹5.85 लाख करोड़ तक पहुंच गया है. व्यापार, होटल और रेस्टोरेंट का योगदान 10.35% है. यह शहरी अर्थव्यवस्था की मजबूती जरूर दिखाता है, लेकिन बड़ा सवाल है कि सेवा क्षेत्र की यह वृद्धि रोजगार में कितना योगदान दे रही है? सिर्फ आंकड़ों से विकास नहीं, स्थायी रोजगार भी तय होता है.
सरकार की वित्तीय स्थिति: स्थिरता और दबाव दोनों
राज्य को ₹2,618 करोड़ का राजस्व अधिशेष मिलने का अनुमान है. कर राजस्व 13.57% बढ़ने की उम्मीद है. लेकिन राजकोषीय घाटा GSDP का 4.66% है और कर्ज‑GSDP अनुपात 31.3% पर बना हुआ है. इससे साफ है कि वित्तीय स्थिति स्थिर दिखती जरूर है, लेकिन दबाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ.
ग्रामीण विकास के दावे और चुनौतियां
फसल उत्पादन में 7.66% और खाद्यान्न उत्पादन में 14.68% वृद्धि हुई है. 72,975 किमी ग्रामीण सड़कें बनी हैं और 40.82 लाख ग्रामीण आवास पूरे हुए हैं. दुग्ध उत्पादन 225.95 लाख टन तक पहुंच चुका है. ये सब ग्रामीण विकास की तरफ इशारा करते हैं, लेकिन खेती की लागत, बाजार मूल्य और किसान की वास्तविक आमदनी पर स्पष्ट स्थिति नहीं मिलती.
निवेश, स्टार्टअप और रोजगार- तस्वीर कितनी व्यवहारिक?
6,125 एकड़ भूमि पर 1,028 इकाइयों को आवंटन मिला है. ₹1.17 लाख करोड़ निवेश प्रस्तावित है और 1.7 लाख रोजगार की संभावना बताई गई है. MSME में ₹22,162 करोड़ सहायता दी गई और 1,723 स्टार्टअप सक्रिय हैं. निवेश जरूर बढ़ रहा है, लेकिन प्रस्तावित रोजगार और वास्तविक नियुक्तियों के बीच अंतर कितना रहेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा.
स्वास्थ्य और शिक्षा में सुधार, सकारात्मक संकेत
4.42 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए गए. मातृ मृत्यु दर 379 से घटकर 142 पर आ गई, जो बड़ा सुधार है. शिक्षा पर आबंटन 10.37% है और कक्षा 1‑5 के लिए ड्रॉपआउट दर शून्य बताई गई है. तकनीकी संस्थानों की संख्या 2,070 तक बढ़ना भी एक मजबूत संकेत है.
आंकड़े चमकदार, लेकिन रास्ता अभी लंबा
आर्थिक सर्वेक्षण एक मजबूत और बढ़ती अर्थव्यवस्था की तस्वीर जरूर सामने रखता है. सेवा और उद्योग में तेजी, आय में उछाल और निवेश की पैठ उत्साह बढ़ाती हैं. लेकिन कृषि पर ज्यादा निर्भरता, बढ़ता राजकोषीय दबाव, रोजगार की गुणवत्ता और क्षेत्रीय असमानता जैसे प्रश्न अभी भी बने हुए हैं. विकास दिखाई देता है, लेकिन क्या यह टिकाऊ और सबके लिए समान अवसर पैदा करने वाला मॉडल बनेगा- यही वास्तविक बहस का मुद्दा है.