बस्तर पहुंचते ही भावुक हुए MP के DGP कैलाश मकवाना, IPS ने 32 साल पहले कैसे क‍िया 'लाल आतंक' का सामना?

IPS Kailash Makwana DGP MP:  एमपी के डीजीपी (DGP) आईपीएस कैलाश मकवाना ने सोशल मीडिया पर साल 1994 का अपना एक पुराना संस्मरण साझा किया, जब वे अविभाजित मध्य प्रदेश के बेहद संवेदनशील नक्सल प्रभावित इलाके बस्तर और दंतेवाड़ा में बतौर एसपी (SP) तैनात थे. 

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अविभाजित MP के वो दिन... जब बस्तर-दंतेवाड़ा के SP थे कैलाश मकवाना; नक्सलमुक्त भारत के मौके पर DGP ने ताजा कीं यादें

IPS Kailash Makwana DGP MP:  भारत 31 मार्च 2026 को पूरी तरह से 'लाल आतंक' से मुक्त हो गया है. कभी नक्सलियों का सबसे मजबूत गढ़ रहे छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में भी अब बंदूकें शांत हो चुकी हैं. नक्सलियों की कमर तोड़ने में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के कई जांबाज अधिकारियों ने बेहद अहम भूमिका निभाई है. शायद यही वजह है कि आज भी जब इन अफसरों के कदम नक्सल प्रभावित रहे बस्तर की धरती पर पड़ते हैं, तो पुरानी यादें ताजा हो उठती हैं. ऐसा ही कुछ मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) आईपीएस कैलाश मकवाना के साथ भी हुआ.

गृह मंत्री अमित शाह ने एमपी पुलिस की टीम को किया सम्मानित

मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए लिखा, "केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'पहला नक्सल मुक्त राज्य' बनने की दिशा में किए गए उत्कृष्ट और सराहनीय कार्य के लिए हमारे मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और पूरी टीम को सम्मानित किया. हमारा मिशन सफल हुआ. इस मौके पर शहीद पुलिसकर्मियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. मैंने जगदलपुर (छत्तीसगढ़) में आयोजित केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद की बैठक में भाग लिया, और साथ ही नक्सल प्रभावित राज्यों के डीजीपी (DGP) की विशेष बैठक में भी हिस्सा लिया." 

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DGP कैलाश मकवाना ने याद किए दंतेवाड़ा-बस्तर में बतौर SP के दिन

अपनी इसी सोशल मीडिया पोस्ट के साथ साल 1988 बैच के आईपीएस कैलाश मकवाना ने करीब 32 साल पुराना एक बेहद खास किस्सा भी साझा किया, जो नक्सलवाद के खिलाफ उनके लंबे संघर्ष और योगदान की कहानी बयां करता है. डीजीपी मकवाना ने लिखा, "मैं साल 1994 से 1996 तक दंतेवाड़ा और बस्तर जिले का एसपी (SP) रहा था. आज यहां आकर मेरी पुरानी यादें एक बार फिर ताजा हो गईं." 

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जब अविभाजित मध्य प्रदेश का हिस्सा था छत्तीसगढ़

गौरतलब है कि साल 1994 में छत्तीसगढ़ अलग राज्य नहीं था, बल्कि वह मध्य प्रदेश का ही एक हिस्सा हुआ करता था. यही कारण था कि मध्य प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारियों को दंतेवाड़ा और बस्तर जैसे बेहद चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील जिलों में तैनात किया जाता था. बाद में, साल 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ एक नया राज्य बना. 1980 से यहां नक्‍सली गत‍िव‍िध‍ियां होने लगी थीं. 

जगदलपुर की बैठक में गृह मंत्री ने की नक्सलवाद खात्मे की बड़ी घोषणा

बता दें कि 19 मई 2026 को पहली बार छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में 26वीं मध्य क्षेत्रीय परिषद की यह महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों सहित पांच राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGP) के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा की. गृह मंत्री ने गर्व से घोषणा की कि केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 से पहले ही देश से नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने का अपना बड़ा लक्ष्य हासिल कर लिया है. आज बस्तर भी पूरी तरह से भय और बंदूक के साये से बाहर निकलकर नक्सलमुक्त हो चुका है. 

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