MP कांग्रेस को फिर लगा बड़ा झटका, पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने छोड़ी पार्टी, लगाए ये गंभीर आरोप

MP Congress News: इस्तीफे का ऐलान करते हुए लक्ष्मण तिवारी ने कहा कि कांग्रेस में गुटबाजी इस कदर हावी हो चुकी है कि वरिष्ठ नेताओं को भी महत्व नहीं दिया जा रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक होने के बावजूद उन्हें पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाता था और न ही उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी जाती थी. उनका आरोप है कि मऊगंज से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी लगातार अनदेखी की जा रही थी, जिससे वे खुद को अपमानित और उपेक्षित महसूस कर रहे थे.

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Congress  Leader Left Party in Madhya Pradesh: कांग्रेस पार्टी (Congress Party) को मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मऊगंज (Mauganj) क्षेत्र से एक बार फिर बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. दरअसल, वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी (Laxman Tiwari) ने पार्टी पर गुटबाजी के गंभीर आरोप लगाते हुए प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है. उनके इस फैसले से क्षेत्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है.

इस्तीफे का ऐलान करते हुए लक्ष्मण तिवारी ने कहा कि कांग्रेस में गुटबाजी इस कदर हावी हो चुकी है कि वरिष्ठ नेताओं को भी महत्व नहीं दिया जा रहा. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व विधायक होने के बावजूद उन्हें पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाता था और न ही उन्हें संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी जाती थी. उनका आरोप है कि मऊगंज से जुड़े कार्यक्रमों में भी उनकी लगातार अनदेखी की जा रही थी, जिससे वे खुद को अपमानित और उपेक्षित महसूस कर रहे थे.

पहले भी कर चुके हैं दलबदल

लक्ष्मण तिवारी ने लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस का दामन थामा था. इससे पहले वे अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े रहे हैं. पिछला विधानसभा चुनाव उन्होंने समाजवादी पार्टी के टिकट पर सिरमौर से लड़ा था. हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. राजनीतिक गलियारों में उन्हें कभी उमा भारती के करीबी नेताओं में भी गिना जाता था. वे खुद को लंबे समय से सक्रिय और अनुभवी नेता बताते हैं.

‘अब पुराने तेवर में करूंगा राजनीति'

इस्तीफे के साथ ही लक्ष्मण तिवारी ने संकेत दिए कि अब वे पहले की तरह आक्रामक अंदाज में राजनीति करेंगे. उन्होंने कहा कि वे किसी समय एक राष्ट्रीय पार्टी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं और जानते हैं कि संगठन कैसे चलाया जाता है और राजनीतिक लड़ाई कैसे लड़ी जाती है. उनके इस बयान को आने वाले समय में किसी नए राजनीतिक समीकरण या मोर्चे की तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है.

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लक्ष्मण तिवारी के इस्तीफे के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे आगे किस राजनीतिक दल या मंच के साथ नजर आएंगे. क्या वे फिर किसी बड़ी पार्टी का रुख करेंगे या क्षेत्रीय राजनीति में नई भूमिका तलाशेंगे. इस पर सबकी नजरें टिकी हैं. फिलहाल, कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति और गुटबाजी के आरोपों ने एक बार फिर संगठनात्मक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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