MP Chhattisgarh Leopard Deaths: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में एक के बाद एक तेंदुओं की संदिग्ध मौतों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. 3 जनवरी 2026 को मध्य प्रदेश के तीन जिलों नरसिंहपुर, रायसेन और देवास में तेंदुओं की मौत की खबर सामने आई, जबकि चौथा मामला छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव जिले से सामने आया है. चारों मामलों में मौत के कारण स्पष्ट नहीं हो पाए हैं और वन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
MP में तेंदुए की मौत का पहला मामला
मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले का है, जहां करेली वन परिक्षेत्र के ग्वारीकला बीट में एक तेंदुए का शव संदिग्ध हालत में मिला. सूचना मिलने पर डीएफओ सहित वन विभाग का अमला मौके पर पहुंचा. डॉग स्क्वॉड और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी जांच में जुटी है, लेकिन फिलहाल मौत के कारणों का खुलासा नहीं हो सका है.
नरसिंहपुर DFO कल्पना तिवारी कहती हैं कि करेली वन परिक्षेत्र के ग्वारीकला बीट में तेंदुए की संदिग्ध मौत की सूचना पर मौका मुआयना किया है. मौत के वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे.
एमपी में तेंदुए की मौत का दूसरा मामला
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के बेगमगंज रेंज के सुनहेरा बीट से सामने आया, जहां एक युवा तेंदुए का शव नाले में पड़ा मिला. शिकार की आशंका के चलते वन विभाग ने सुनहेरा गांव और आसपास के जंगल में तलाशी अभियान चलाया, लेकिन कोई ठोस सबूत नहीं मिला. डीएफओ प्रतिभा शुक्ला, रेंजर अरविंद अहिरवार और भोपाल से आई विशेष जांच टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की है.
एमपी में तेंदुए की मौत का तीसरा मामला
मध्यप्रदेश के देवास जिले के पालनगर क्षेत्र का है, जहां शहर से सटे इलाके में एक तेंदुए की मौत जाली में फंसने से हो गई. वन विभाग ने पोस्टमार्टम के बाद मौत के वास्तविक कारणों का पता लगाने की बात कही है.
CG में तेंदुए की मौत का मामला
छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव जिले का है. डोंगरगढ़ वन परिक्षेत्र के रानीगंज इलाके में एक तेंदुआ मृत अवस्था में मिला. वन विभाग का दावा है कि तेंदुए को आंतरिक चोटें थीं और मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, हालांकि इस संबंध में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है. इन घटनाओं और स्पष्ट जानकारी के अभाव में वन विभाग की भूमिका पर अब सवाल उठने लगे हैं.