मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू,सरकार ने कहा- बरकतउल्ला विवि का नाम नहीं बदलेगा

मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है. बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की चर्चाओं पर विराम लगाते हुए सरकार ने स्पष्ट किया कि यूनिवर्सिटी का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है.

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सोमवार से मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र शुरू हुआ है. पहले दिन ही सदन से लेकर सड़क तक समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और किसानों के मुद्दों को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस के विरोध पर निशाना साधते हुए भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस मुल्ला -मौलवियों के दबाव में यूसीसी का विरोध कर रही है. किसानों के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि राज्य में किसान खुश हैं और उन्हें खाद, बीज, बिजली व पानी समय पर मिल रहा है. इसके अलावा, विधानसभा में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की चर्चाओं पर भी शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है.

यूसीसी पर भाजपा का हमला, कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेगा और राज्य में यूसीसी लागू किया जाएगा.

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उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस हलाला प्रथा की समर्थक है और मुल्ला-मौलवियों के दबाव में आकर ही यूसीसी का विरोध कर रही है. इसके साथ ही उन्होंने किसानों के मुद्दे पर कहा कि प्रदेश में किसानों की आय लगातार बढ़ रही है और उन्हें किसी तरह की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ रहा है.


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बरकतउल्ला विश्वविद्यालय का नाम बदलने की मंशा नहीं: सरकार

उधर, विधानसभा में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के नाम बदलने की चर्चाओं पर भी विराम लग गया. विधायक आतिफ आरिफ अकील के सवाल पर उच्च शिक्षा विभाग ने लिखित जवाब प्रस्तुत किया. मंत्री इंदर सिंह परमार ने साफ किया कि 1988 में स्थापित इस विश्वविद्यालय का नाम बदलने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है.स्वतंत्रता संग्राम सेनानी डॉ. बरकतउल्ला भोपाली के नाम से जुड़े इस विश्वविद्यालय के संबंध में पूछे गए अन्य सवालों पर सरकार ने कहा कि जानकारी जुटाई जा रही है. इसके साथ ही सरकार ने प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए बताया कि किसी भी विश्वविद्यालय का नाम बदलने के लिए संबंधित अधिनियम में संशोधन विधेयक लाना अनिवार्य होता है.फिलहाल सरकार का ऐसा कोई विचार नहीं है. 
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